Tags » Press Club

WDSU staff up for 21 Press Club awards


WDSU is a finalist in several Press Club of New Orleans awards categories (listed below). The finalists were announced during the Press Club’s annual meeting Monday night. 183 more words

Blog

San Kazakgascar Super Sunday

San Kazakgascar is playing an early show at the Press Club in Sacramento on Sunday, May 29.  The show starts at 5pm and will include two experimental soundscapers from Portland, … 36 more words

اگر کوئی خبر حکومت کو ناگوار گزرے تو حکومت کی طرف سے صحافیوں کو دھمکیاں ملتی ہیں

گلگت پریس کلب میں عالمی یوم صحافت کے موقع پر صحافتی تنظیموں کے عہدیداران پھٹ پڑے.گلگت بلتستان میں ریاست کے چوتھے ستون کو ہر ممکن دبانے کی کوشش ہورہی ہیں.اگر کوئی خبر حکومت کو ناگوار گزرے تو اشتہارات بند کئے جاتے ہیں اور حکومت کی طرف سے دھمکیاں ملتی ہیں.اور اداروں کو مجبور کیا جاتا ہیں.اظہار رائے کی ازادی اور معلومات تک رسائی گلگت بلتستان میں خواب بن چکا ہیں.ان خیالات کا اظہار گلگت پریس کلب کی جانب سے عالمی یوم صحافت کے حوالے سے منعقدہ سیمینار سے صحافیوں نے اظہار خیال کرتے ہوئے کہا. کہ یہاں اج تک صحافیوں کے تحفظ اور حقوق کے لئے قانون سازی نہیں کی گئی ہیں اور ویج بورڈ ایوارڈ کا نفاز ابھی تک نہیں ہو سک ہیں.اور میڈیا کالونی کے لئے گزشتہ 10سالوں سے جدوجہد کر رہے ہیں مگر ٹرخایا جارہا ہیں.کوئی بھی حکومت اتی ہیں تو وہ چوتھے ستون کو گرانے کی سازش کرتی ہیں
معاشرے کا باشعور طبقے کو دیوار سے لگایا جارہا ہیں.اور ہمیں دبانے کی ہر ممکن کوشش کی جاتی ہیں.سابقہ حکومت نے باقاعدہ نوٹس جاری کردیا تھا کہ صحافیوں کو معلومات فراہم نہ کیا جائے اگر یہی رویہ رہا تو گلگت بلتستان میں کسی صورت صحافت پروان نہیں چڑھے گی.اس موقع پر مہمان خصوصی سپیکر گلگت بلتستان اسمبلی فدا محمد ناشاد اور پالیمانی سیکریٹری اورنگزیب ایڈوکیٹ نے خطاب کرتے ہوئے کہا کہ بہت جلد صحافیوں کے حقوق کے لئے اور مراعات کے لئے اسمبلی میں بل لائینگے اور باقاعدہ قانون سازی کرینگے.حکومت کسی صحافی کو دھمکی و اشتہارات روکنے کے لئے نہیں کہا ہے.اگر کسی افیسر نے ایسا کیا ہیں تو اس کے خلاف کاروائی کرینگے.اور ایسے قوانین وضع کرینگے جس سے صحافیوں کو ان کے حقوق مل سکے اور وہ مستحکم ہو سکے۔ کیونکہ یہی صحافی ہیں جو مسائل کو اجاگر کر رہے ہیں.میڈیا کالونی اور ویج بورڈ ایوارڈ کے حوالے سے جو قوانین کے پی کے حکومت نے پاس کیا ہیں اسی طرز پر بہت جلد قانون بنائینگے.اس موقع پر سینئر صحافی سعید حسن کے لئے فاتحہ خوانی بھی کروائی گئی

گلگت بلتستان

The Invisibility of US Oligarchs: the Case of Penny Pritzker

From Counter Punch

by SAM HUSSEINI

Other countries, not the U.S., have oligarchs apparently.

Billionaire and Commerce Secretary Penny Pritzker came and went to the National Press Club with hardly a tough question on Monday — see… 1,195 more words

The Elite, Or “TPTB”

НОВИНИ ОТ БЪДЕЩЕТО: Викинги и кристали

София, 22 април 2015 г. – В Деня на Земята, участници в олимпийските отбори на България по природни науки представиха бъдещето – това, което се случва днес, благодарение на науката. Отборите поканиха представители на медиите у нас на специална среща, за да представят накратко себе си и своята дейност с любопитни новини от света на науката, филм и демострация. Целта на срещата бе да бъде създаден Олипмийски пресклуб – кръг от приятели на образованието и науката. Основна роля на клуба ще бъде да информира обществеността за дейността, постиженията и успехите на олимпийските ни отбори по природни науки, донесли на България стотици медали от най-престижните научни състезания за младежи в света.

На срещата всеки от отборите представи своята новина от бъдещето, на която всички ще станем свидетели съвсем скоро, благодарение на областта, в която съответният отбор се състезава. Отборът на Младите физици представи една от задачите на Турнира през 2011 г., проведен в Иран.

Новини от бъдещето

देशद्रोह के आरोपी एसएआर गिलानी को 50 हजार के निजी मुचलके पर मिली जमानत

दिल्ली यूनिवर्सिटी के पूर्व प्रोफेसर और देशद्रोह के आरोपी एसएआर गिलानी को पटियाला हाउस कोर्ट से जमानत मिल गई है. कोर्ट ने उन्हें 50 हजार रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दी है. इसके पहले शनिवार सुबह कोर्ट ने जमानत पर अपना फैसला दोपहर दो बजे तक सुरक्षित रख लिया था.
जमानत याचिका का पुलिस ने किया विरोध
आरोप के मुताबिक नई दिल्ली स्थित प्रेस क्लब में एक कार्यक्रम आयोजित कर गिलानी ने देशविरोधी नारेबाजी की थी . सुनवाई के दौरान गिलानी की जमानत याचिका का विरोध करते हुए पुलिस ने उनके विवादित कार्यक्रम को भारत की आत्मा पर हमला और अदालत की अवमानना बताया था. पुलिस ने कहा कि कश्मीर देश का अभिन्न हिस्सा है, लेकिन गिलानी अफजल गुरु और मकबूल भट का महिमामंडन कर रहे थे. उन्हें सुप्रीम कोर्ट ने दोषी ठहराया था. वह लोग उन्हें शहीद बता रहे थे जिसका लोगों पर असर पड़ता है. यह अदालत की अवमानना है. पुलिस ने कहा कि अगर उन्हें फैसला पसंद नहीं था तो उन्हें यह बात अपने दिमाग और अपने घर में ही रखनी चाहिए थी.

नारेबाजी के बाद प्रेस क्लब से निकाले गए थे लोग
जिरह के दौरान गिलानी के वकील ने कहा कि उनके मुवक्किल के खिलाफ इस बात के कोई प्रमाण नहीं है कि उन्होंने कथित भारत विरोधी नारे लगाए थे. वकील ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले की आलोचना करना अदालत की अवमानना नहीं है. वकील ने जमानत के लिए आग्रह करते हुए दावा किया कि प्राथमिकी में ही कहा गया है कि नारे लगा रहे लोगों को प्रेस क्लब के पदाधिकारियों ने रोका. उनकी ओर से चले जाने के लिए कहने पर लोग सहमत हो गए थे.

सरकार के खिलाफ नफरत फैलाने की कोशिश
इससे पहले, 19 फरवरी को दिल्ली के एक कोर्ट ने गिलानी की जमानत याचिका खारिज कर दी थी. 16 फरवरी को गिरफ्तार किए गए गिलानी पर पुलिस ने आरोप लगाया था कि सरकार के खिलाफ नफरत पैदा किया जा रहा है. इससे पहले पुलिस ने कोर्ट को बताया था कि 10 फरवरी को एक समारोह आयोजित किया गया था. इसमें अफजल गुरु और मकबूल भट्ट को शहीदों के रूप में दर्शाने वाले बैनर लगाए गए थे.
अफजल गुरु और मकबूल भट्ट की तारीफ में नारे
पुलिस ने कहा था कि गिलानी ने प्रेस क्लब में हॉल की बुकिंग अली जावेद नामक शख्स के माध्यम से उसके क्रेडिट कार्ड से करवाई थी. एक अन्य शख्स मुद्दस्सर भी इसमें शामिल था. प्रेस क्लब के समारोह में एक समूह ने कथित तौर पर अफजल गुरु की तारीफ में नारे लगाए थे. इसके बाद पुलिस ने आईपीसी की धारा 124ए (देशद्रोह), 120बी (आपराधिक साजिश) और 149 (अवैध रूप से एकत्र होना) के तहत गिलानी और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था.

पुलिस ने लिया था स्वतः संज्ञान
पुलिस ने दावा किया था कि उसने मीडिया में आई इस घटना की खबरों पर स्वत:संज्ञान लेते हुए प्राथमिकी दर्ज की. प्राथमिकी दर्ज करने के बाद पुलिस ने डीयू के प्रोफेसर अली जावेद से दो दिन तक पूछताछ की थी. जावेद प्रेस क्लब के सदस्य हैं. उन्होने ही इस आयोजन के लिए हॉल बुक करवाया था.

संसद हमले के आरोप में जेल जा चुके हैं गिलानी
गिलानी को साल 2001 में संसद पर हुए हमले के सिलसिले में भी गिरफ्तार किया गया था. बाद में दिल्ली हाई कोर्ट ने सबूतों के अभाव में अक्तूबर 2003 में उन्हें बरी कर दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त 2005 में इस फैसले को बरकरार रखा था.

Delhi