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Risk to Return ratio- When Portfolio Theory Meets Cricket

Cricketing community has relied on test average to benchmark players’ performances for decades. Its simplicity and convenience has become the cornerstones of its popularity. Although it gives us a perfect picture of the mean runs scored per inning, the results are easily distorted by some basic concepts in statistics. 1,014 more words

Some things that make most people love Rahul Dravid so much

For displaying a different brand of absolute humility:
Despite his mammoth achievements, Dravid has always been a firmly rooted personality. He has been called a “boring” cricketer innumerable times, but not once have we seen even an outburst. 787 more words

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पुण्यतिथि विशेष : देश के पहले असली ऑलराउंडर थे दत्तू फडकर - Dattu Phadkar, First Real Allrounder Of Indian Cricket

नई दिल्ली। 1932 में पहली बार भारत के टेस्ट क्रिकेट संग्राम में उतरने के बाद गुरुवार को भारतीय क्रिकेट टीम रांची में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपना 511वां टेस्ट मैच खेलने उतरी। इस दौरान 287 क्रिकेटरों ने देश के लिए टेस्ट कैप पहनने का श्रेय हासिल किया। लेकिन बात आती है, जब ऑलराउंड क्रिकेटरों की तो देश के खाते में सिर्फ 38 खिलाड़ी ऐसे आते हैं, जो 50 या उससे ज्यादा विकेट भी रनों का अंबार लगाने के साथ-साथ अपने खाते में शामिल कर पाए। इन ऑलराउंडरों की सूची में बल्ले और गेंद के बीच औसत के अंतर के हिसाब से दत्तू फडकर 7वें नंबर पर आते हैं। लेकिन 17 मार्च, 1985 को भारतीय क्रिकेटप्रेमियों का साथ छोड़कर दूसरी दुनिया के लिए रवाना हो गए 6 फुट लंबे इस क्रिकेटर की खूबी बस इतनी सी ही नहीं थी।

ऑस्ट्रेलियाई पिचों पर किया था धमाकेदार आगाज
ऑस्ट्रेलियाई पिचों का नाम सुनते ही जहां दुनिया के बड़े से बड़े बल्लेबाज की आज भी ‘नानी’ कांपती है, यदि किसी बल्लेबाज को उन्हीं पिचों पर अपना अंतरराष्ट्रीय करियर शुरू करना हो तो उसका क्या हाल होगा? दत्तू फडकर ने अपना टेस्ट करियर इन्हीं ऑस्ट्रेलियाई पिचों पर तब शुरू किया था, जब देश की आजादी के जश्न के खुमार में डूबा हुआ था। भारतीय टीम पहली बार ऑस्ट्रेलिया का दौरा कर रही थी। ऐसे में इस टीम के पास न तो वहां के विकेटों का मिजाज बताने वाला अपने किसी पुराने क्रिकेटर की सलाह मौजूद थी और न ही वहां के क्रिकेटरों के बारे में बहुत ज्यादा जानते थे।

ऐसी परिस्थितियों के बीच 12 दिसंबर 1947 को सिडनी क्रिकेट ग्राउंड पर अपने टेस्ट करियर का पहला रन उस ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजी के सामने बनाया था, जिसकी अगुआई रे लिंडवाल और कीथ मिलर जैसे खौफनाक तेज गेंदबाजों की जोड़ी कर रही थी। बता दें कि लिंडवाल और मिलर को टेस्ट इतिहास के सर्वश्रेष्ठ तेज गेंदबाजों में गिना जाता है। यह सीरीज का दूसरा टेस्ट मैच था। दत्तू फडकर ने अपने करियर की शुरुआत 51 रन की शानदार अद्र्धशतकीय पारी से की और मैच में 14 रन देकर 3 विकेट भी चटकाए।

विशेषज्ञों ने लिखा था कि फडकर उधेड़ते हैं गेंदबाज की बखिया
उस सीरीज की मैच रिपोर्ट पढ़ी जाएं तो तत्कालीन ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट विशेषज्ञों ने इस लंबे-चौड़े ऑलराउंडर की जमकर तारीफ की और लिखा गया कि फडकर न केवल जमकर बल्लेबाजी करते हैं बल्कि लिंडवाल और मिलर जैसे गेंदबाजों की बखिया उधेडऩे वाले शॉट खेलने से भी परहेज नहीं करते। गेंद को सीम और स्विंग कराने में माहिर फडकर अपनी दाएं हाथ की बल्लेबाजी से विकेट के चारों तरफ शॉट खेलते थे और आजकल के वनडे मैचों की तरह उस समय के टेस्ट मैचों में भी उनका गेंद को क्षेत्ररक्षक के सिर के ऊपर से उठाकर बड़ा शॉट खेलने के लिए मारना दर्शकों को ‘टुकटुक मार्का’ बल्लेबाजी के दौर में अलग ही अनुभूति देता था।

शीर्ष-3 बल्लेबाजों में थे पहली ही सीरीज में
फडकर ने अपनी पहली सीरीज में 4 टेस्ट मैचों में 314 रन बनाने में जहां 3 शानदार अद्र्धशतक और अपना पहला शतक लगाया, वहीं 8 विकेट चटकाकर अपनी मध्यम तेज गति गेंदबाजी से भी टीम को भरपूर सहयोग दिया। नतीजा 5 टेस्ट मैच की सीरीज में भारत ने 4 टेस्ट हारे, लेकिन 1 टेस्ट ड्रॉ कराने में वह सफल रहा, जो विशेषज्ञों ने भी एक गैरअनुभवी टीम की बड़ी सफलता माना। दत्तू फडकर इस दौरे पर भारतीय टीम की तरफ से टेस्ट मैचों में तीसरे सबसे सफल बल्लेबाज साबित हुए।

भारत की पहली टेस्ट जीत में भी दिया अहम योगदान
दत्तू फडकर के करियर में यदि भारतीय टीम की पहली टेस्ट जीत का जिक्र नहीं किया जाए तो यह शायद उस बेहतरीन ऑलराउंडर के साथ नाइंसाफी होगी। 1952 में मद्रास (अब चेन्नई) में इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज के 5वें टेस्ट को पंकज रॉय और पाली उमरीगर के शतकों तथा वीनू मांकड के 12 विकेटों के लिए ही याद किया जाता है। लेकिन टेस्ट के पहले ही ओवर में इंग्लिश ओपनर फ्रेंक लॉसन को पवेलियन लौटाकर जो झटका दिया, वो शायद इंग्लिश मनोबल को तोडऩे वाला साबित हुआ।

भारत की पहली पारी में उनकी 61 रन की बेहतरीन पारी ने ही पाली उमरीगर को अपने शतक के लिए बड़ी साझेदारी के जरिए आधार बनाने में मदद दी। फडकर के इन 61 रन की तारीफ उमरीगर ने भी बाद में कई बार अपने इंटरव्यू में की। आपको बता दें कि इस टेस्ट मैच में इंग्लैंड की गेंदबाजी की कमान फ्रेंक टायसन (जिन्हें उनकी तेजी के लिए टायफून भी कहा जाता था) और ब्रायन स्टेथम जैसे आला दर्जे के गेंदबाज संभाल रहे थे। टेस्ट मैच की दूसरी पारी में भी फडकर ने 191 रन से पिछड़ी इंग्लैंड का मनोबल एक बार फिर लॉसन को सिर्फ 7 रन पर आउट करते हुए स्कोर 2 विकेट पर 15 रन करते हुए तोड़ दिया था।

कोलकाता में खेली थी टेस्ट बचाने वाली पारी
कोलकाता के इडेन गार्डंस स्टेडियम को भले ही आजकल के क्रिकेटप्रेमी सबसे ज्यादा वीवीएस लक्ष्मण-राहुल द्रविड़ की साझेदारी और हरभजन सिंह की हैट्रिक के लिए याद रखते हों, लेकिन यह मैदान फडकर के भी सबसे बेहतरीन ऑलराउंड प्रदर्शन का साक्षी रहा है। यह प्रदर्शन भी 1951-52 की उसी सीरीज में आया था, जिसमें बाद में भारत ने अपना पहला टेस्ट मैच जीता था। कोलकाता में हुए सीरीज के तीसरे टेस्ट मैच में फडकर ने इंग्लैंड के 342 रन के सामने सिर्फ 144 रन पर पंकज रॉय, वीनू मांकड, लाला अमरनाथ, पाली उमरीगर, विजय हजारे जैसे बड़े बल्लेबाजों के विकेट खोकर संकट में फंसी भारतीय टीम को 115 रन की पारी खेलते हुए 344 रन के स्कोर पर पहुंचाया और 2 रन की मनोवैज्ञानिक बढ़त भी दिलाई। इस टेस्ट में फडकर ने इंग्लैंड के 4 अहम विकेट भी चटकाए थे। नतीजतन भारत यह टेस्ट ड्रॉ कराने में सफल रहा था।

2012 में याद किया बीसीसीआई ने
31 टेस्ट में 32.34 के औसत से 1229 रन बनाने वाले और 36.85 के औसत से 62 विकेट चटकाने वाले दत्तू फडकर के भारतीय क्रिकेट में योगदान को भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने भी 2012 में सराहा था, जब उन्हें भी 7 अन्य महान क्रिकेटरों के साथ ‘भारतीय क्रिकेट में सबसे अहम योगदान’ के लिए विशेष बीसीसीआई अवॉर्ड मरणोपरांत दिया गया था। फडकर का साहस आज भी ऑस्ट्रेलिया में पहली बार खेल रहे किसी भी भारतीय क्रिकेटर के लिए प्रेरणा साबित हो सकता है।

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आईपीएल के लिए इस ट्रॉफी में भारतीय टीम की कोचिंग छोड़ देंगे राहुल द्रविड़- Rahul Dravid Will Leave Indian Team Coaching For IPL

नई दिल्ली। देश की सभी जूनियर क्रिकेट टीमों के कोच और पूर्व महान बल्लेबाज राहुल द्रविड़ इस महीने के अंत में अंडर-23 टीम को कोचिंग नहीं देंगे। यह टीम एशियन क्रिकेट काउंसिल की एमर्जिंग ट्रॉफी में भाग लेने के लिए बांग्लादेश जाएगी, जहां 25 मार्च से 5 अप्रैल तक टूर्नामेंट का आयोजन होगा।

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने इस दौरान पूर्व भारतीय कप्तान राहुल द्रविड़ को राष्ट्रीय अंडर-23 टीम की जिम्मेदारी से मुक्त करते हुए अपनी इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) फ्रेंचाइजी दिल्ली डेयरडेविल्स से जुडऩे की अनुमति दे दी है। इसके चलते दिल्ली डेयरडेविल्स के कोच राहुल द्रविड़ टीम के साथ 28 मार्च से राजधानी दिल्ली में शुरू हो रहे ट्रेनिंग कैंप में जुड़ पाएंगे। द्रविड़ की जगह टीम के साथ नेशनल क्रिकेट एकेडमी के कोच और पूर्व भारतीय क्रिकेटर डब्ल्यूवी रामन व नरेंद्र हिरवानी को मिलने के संकेत एक बीसीसीआई सूत्र ने दिए हैं।

बता दें कि द्रविड़ का बीसीसीआई के साथ कोचिंग कांट्रेक्ट 31 मार्च को खत्म हो रहा है, जबकि एमर्जिंग ट्रॉफी का आयोजन 5 अप्रैल तक होना है। ऐसे में द्रविड़ नैतिक तौर पर भी अपनी आईपीएल टीम के साथ जुडऩे के लिए स्वतंत्र थे। बीसीसीआई की तरफ से अप्रैल और मई के महीने में कोचिंग स्टाफ के सदस्य अपनी सेवाएं आईपीएल फ्रेंचाइजी को देने के लिए स्वतंत्र हैं।

5 अप्रैल से शुरू हो रही आईपीएल के लिए बीसीसीआई पहले ही सभी अंडर-23 क्रिकेटरों को एमर्जिंग ट्रॉफी से छूट दे चुका है और ऐसे में वहां पर बिल्कुल नए चेहरों को मौका मिलने की उम्मीद है। इनमें सबसे ज्यादा निगाहें 17 साल के पृथ्वी शॉ, अभिमन्यु ईश्वरन और मयंक डागर जैसे अगली पीढ़ी का भविष्य माने जा रहे क्रिकेटरों पर होंगी, जिन्हें अभी आईपीएल फ्रेंचाइजी का साथ नहीं मिला है।

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இந்திய கிரிக்கெட் அணிக்கு புதிய பயிற்சியாளர்?

இந்தியா: இந்திய கிரிக்கெட் அணியின் புதிய பயிற்சியாளராக ராகுல் டிராவிட் தேர்வு செய்யப்பட இருப்பதாக தகவல்கள் வெளியாகியுள்ளன.

தற்போதைய பயிற்சியாளரான அனில் கும்ப்ளே, இந்திய அணியின் இயக்குனராக பதவி உயர்வு பெற இருப்பதாக ஊடகங்களில் செய்தி வெளியாகியுள்ளது. நடப்பு ஆஸ்திரேலிய தொடருக்கு பின்னர் பிசிசிஐ அமைப்பை நிர்வகிக்க உச்சநீதிமன்றம் அமைத்துள்ள கமிட்டியின் ஒப்புதல் பெற்று இந்த மாற்றம் செய்யப்பட இருப்பதாகவும் கூறப்படுகிறது. இந்திய அணியின் இயக்குனராக வரும் ஏப்ரல் 14 முதல் அனில் கும்ப்ளே செயல்படுவார் என்றும் செய்திகள் வெளியாகியுள்ளன. இதனால், 19 வயதுக்குட்பட்டோருக்கான இந்திய கிரிக்கெட் அணியின் பயிற்சியாளராக இருக்கும் ராகுல் டிராவிட், இந்திய அணியின் பயிற்சியாளராக நியமிக்கப்படலாம் என்றும் பிசிசிஐ வட்டாரங்கள் தெரிவிக்கின்றன.

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These stories will give you an idea about Rahul Dravid off the field.

1. As per the contract, he was supposed to hand out signed bats to underprivileged kids. But what he did was something amazing.

He decided to give the kids a good time. 605 more words

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