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Rahul Gandhi staring at 2 years in jail if convicted in RSS defamation suit

Congress vice president Rahul Gandhi is staring at a 2-year jail term, a fine or both if he is convicted in the defamation case filed against him. 22 more words

Vicky Nanjappa

ഡല്‍ഹിയെ പിടിച്ചുകുലുക്കി മലയാളിയുടെ പോരാട്ടം

നീതിക്കും ന്യായത്തിനും വേണ്ടി നിലകൊള്ളുന്നു എന്ന അരവിന്ദ് കെജരിവാളിന്റെ അവകാശവാദം പൊള്ളയാണോ? അഴിമതിയുടെ കാര്യത്തില്‍ ആം ആദ്മി പാര്‍ട്ടിക്കാരനായ ഡല്‍ഹി മുഖ്യമന്ത്രിയും മറ്റു രാഷ്ട്രീയക്കാരും ഒരേ ജനുസ്സില്‍പ്പെട്ടവര്‍ തന്നെയാണോ? ഡല്‍ഹിക്കാര്‍ തന്നെ ഈ ചോദ്യം ഇപ്പോള്‍ ഉച്ചത്തില്‍ ചോദിച്ചുതുടങ്ങിയിരിക്കുന്നു. കെജരിവാളിനെതിരായ ചോദ്യങ്ങള്‍ക്ക് ഇപ്പോള്‍ കാറ്റുപിടിക്കാന്‍ കാരണം ഒരു മലയാളിയുടെ പോരാട്ടമാണ്, വെള്ളം ചേര്‍ക്കാത്ത നിലപാടുകളാണ്. കോട്ടയം അടിച്ചിറ സ്വദേശി പാലത്തുരുത്ത് കടുതോടിയില്‍ എബ്രഹാമിന്റെയും പരേതയായ അന്നമ്മയുടെയും മകന്‍ ജോഷില്‍ കെ.എബ്രഹാമിനെ ഇപ്പോള്‍ ഡല്‍ഹിക്കാര്‍ മുഴുവനറിയും.

ആരാണ് ഈ ജോഷില്‍? എന്തിനാണ് അദ്ദേഹത്തിന്റെ പോരാട്ടം?
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V S SYAMLAL

​सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला - सोनी मैक्स पर सूर्यवंशम के प्रसारण पर रोक !

आज सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला देते हुए सोनी मैक्स चैनल पर सूर्यवंशम फ़िल्म के प्रसारण पर अस्थायी रोक लगा दी, इस फैसले से जहाँ कई लोग खुशियों के लड्डू बाँट रहे है तो कुछ लोग मायूस भी हो गए ।

जब हमने एक गृहणी से इस के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि “सूर्यवंशम एक फ़िल्म न होकर हमारी दिनचर्या का हिस्सा है, कब बाल धोने है, गुड्डू को कब ट्यूशन भेजना है , कपड़े कब लांड्री पर देने है, गमले में पानी कब डालना है , इन सारे कार्य के लिए हमे रिमाइंडर की जरूरत नहीं पड़ती है, जब भी मैक्स पर यह फ़िल्म आ रही होती है तो मुझे तुरंत सारे भूले हुए काम याद आ जाते है जिससे हमारे घर मे सुख शांति भी बनी रहती है  लेकिन अब क्या होगा कोई भरोसा नही है । सरकार को इस निर्णय को एक बार आम गृहणी के हित में बदल देना चाहिए ।” बेलन मार के गुड्डू को ट्यूशन भेजती हुई वो चिल्ला उठी ।

इस बैन के बाद सास-बहू के झगड़ो में आकस्मिक वृद्धि देखने को मिली , इस पर महिला आयोग ने पहली बार चाय समोसे के अलावा स्वतः संज्ञान लेते हुए केंद्र सरकार से गुजारिश की है  कि इस बैन को जल्द से जल्द हटाये जिससे कि समाज मे महिलाओं को उनके अधिकार मिल सके ।

इस निर्णय पर युगपुरुष केजरीवाल जी ने ट्वीट करके बताया कि ” भले ही दिल्ली में फ्री wi-fi मिले या न मिले पर सूर्यवंशम फ़िल्म का फर्स्ट डे फर्स्ट शो देखकर फ़िल्म रिव्यु ने देने का मलाल उन्हें ज़िंदगी भर रहेगा।”

जब हमने कॉलेज जा रहे मोंटू उर्फ मोंटी से इस बारे में बात की तो वो हमारे सूत्र के साथ सेल्फी लेने के बाद बोला ” इस हीरा ठाकुर ने तो जीना मुहाल कर रखा था घर मे, इंग्लिश प्रीमियर लीग देखो तो समस्या, एक आध बैक आ जाये सेमेस्टर में तो दिक्कत, गर्लफ्रैंड डिच कर दे तो इसयू, सब बस उसी का एग्जामपल देते है कि सीख उससे कुछ, यू नो ! पापा तो मुझे घर पर हीरा, हीरा बुलाना शुरू भी कर चुके थे लेकिन थैंक गॉड फाइनली मेरी लाइफ में कुछ अच्छा हो रहा है, अब कम से कम उस हीरा ठाकुर से कंपेरीज़न तो नही होगा ।” इसी के साथ उसने सेल्फी स्नैपचैट पर #feelingGood हैशटैग के साथ पोस्ट कर दी ।

जब हमने ओला के सीईओ भाविश अग्रवाल से इस बारे में बात की तो वो बड़े भावुक हो गए और सुनाने लगे -“पापा बताते हैं कि  मैं जब पहली बार स्कूल जा रहा था तभी ये फ़िल्म रिलीज हुए थी तो हम सब ने फर्स्ट डे फर्स्ट शो पूरे परिवार के साथ देखी , तभी से मेंने ठान लिया कि मुझे भी हीरा ठाकुर जैसा ही कुछ करना है जीवन में। फिर समय समय पर मैक्स मेरे सपने के बारे में याद दिलाता रहता था, ये आईआईटी तो बस टाइम पास के लिए गया था बनना तो मुझे ट्रेवल एजेंट ही था और आज आप सब के सामने ‘ओला’ है, ये कहते कहते भाविश भावनाओं में बहकर रोने लग गए । ताजा जानकारी के अनुसार सूर्यवंशम फ़िल्म के दीवानों के लिए ओला ने स्पेशल ऑफर निकला है जिसमे पूरे परिवार के साथ किसी भी नज़दीकी हॉस्पिटल के उदघाटन में जाने के लिए कोई पैसा नही देना पड़ेगा । ये ओला का  सूर्यवंशम ट्रिब्यूट ऑफर है।

डॉ ग्यारसी लाल जो कि एक कोचिंग संस्थान चलाते हैं वो इस निर्णय से बहुत खफा हैं , उनके अनुसार – “मेरे संस्थान का अभी तक शत प्रतिशत रिजल्ट रहता है क्योंकि जो भो स्टूडेंट पढ़ाई में ध्यान नही देता है, उसे सूर्यवंशम फ़िल्म का स्पेशल शो दिखाने की धमकी दी जाती है और बच्चे उसी खौफ से गणित जैसे विषय को बड़ी आसानी से पास कर लेते है।”

अब जब सूर्यवंशम उपलब्ध नही है तो डॉ साहब ने अपने संस्थान को बचाने के लिए आगे की रणनीति पर काम शुरू कर दिया है वो बताते है कि -“जो खौफ सूर्यवंशम का बच्चों में था वो तो अब नही हो सकता लेकिन हम ‘हिम्मतवाला’, ‘दिलवाले’ और ‘तीस मार खां’ से इस नुकसान की भरपाई करने की कोशिश करेंगे ।

जब हमारे सूत्र ने सदी के महानायक अमिताभ बच्चन से इस बारे में बात की तो वो थोड़े मायूस नजर आ रहे थे उन्होंने कहा – “देखो सूर्यवंशम से मेरे घर का चूल्हा जल रहा है, परिवार पालने के लिए एक ही फ़िल्म में दो दो रोल करने पड़ रहे है। अभिषेक का तो पता ही है आपको , साहबज़ादे को कबड्डी का शौक लगा है इस उम्र में, जब कमाने का समय है तो वो टाइम पास कर रहे है।  जितनी उसकी टीम पूरे साल दो सीजन खेल कर कमाती है उतना तो पवन नेगी ने पिछले आईपीएल सीजन में कमा लिये, अब कौन समझाए इनको  कि उनकी कमाई से तो बहू के महीने का मेक अप का सामान नही आता है।” अब रिटायरमेंट की उम्र में भी काम न करूं तो क्या करूँ।”ये कहते कहते रुआंसे हो गए और हमारे सूत्र ने भी पतली गली से निकलने में ही अपनी भलाई समझी ।

अभी अभी सूत्रों से पता चला है कि रामपुर में हॉस्पिटल का उदघाटन करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस बारे में बात की, उनके अनुसार “भाइयो, बहनों ! हीरा ‘भाई’ ठाकुर एक फ़िल्म चरित्र ही न होकर प्रेरणा स्त्रोत है, उनके जीवन के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करना चाहिए । वो हमारी कई योजनाओ जैसे स्टार्टअप इंडिया, स्किल इंडिया के अघोषित ब्राण्ड एम्ब्सेडर थे । मै लोकसभा अध्यक्षा से निवेदन करूँगा कि ‘दंगल’ के बाद ‘सूर्यवंशम’ का भी माननीय सांसदों के लिए संसद भवन में स्पेशल स्क्रीनिंग रखें।”

Satire

With Congress in tatters, Sonia is back in action

Sonia Gandhi who returned from abroad following medical treatment is back in action. She will chair a meeting of the Congress leaders ahead of the budget session and also host a dinner. 25 more words

Vicky Nanjappa

'भारत के वीर जवान' की तर्ज पर 'पाक के ना'पाक मंसूबे' लॉन्च  !

जब से भारत के गृह मंत्रालय ने भारत के वीर जवान वेबसाइट लांच की है, आईएसआई और पाक रेंजर्स के अधिकारी सदमे में चले गए और आनन फानन में अपने सैनिकों(आतंकियों) के लिए भी ऐसी योजना लाने का प्लान बनाया है।
सूत्रों के अनुसार भारत से एक कदम आगे बढ़ते हुए  वेबसाइट, मोबाइल एप्प और सैटेलाइट फ़ोन लांच करने की योजना हैं, उन्होंने कहा कि पाक रेंजर्स हमेशा से ही ना’पाक इरादों को लेकर युद्ध लड़ते है । इस योजना के क्रियान्वयन के लिए एक उच्च स्तरीय कमीटी बनाई गई हैं जो पहले पता करेगी कि वेबसाइट क्या होती हैं और इसके क्या दुष्प्रभाव हो सकते हैं।
अपनी किडनी का इलाज कराने के लिए हवाई जहाज में बैठते हुए पाक प्रधानमंत्री ने जनता से अपील की है कि सब लोग अपने वतन के लिए धन और किडनी का दान करे, जिसे अरब देशों में बेचकर वेबसाइट का इंतज़ाम किया जा सके और खुद लंदन रवाना हो गए ।
पाक सरकार ने प्रस्ताव पत्र  (कटोरा) लेकर अपने विदेश मंत्री को नए नवेले मित्र चीन भेजा है जिससे कि जिहादीयों के लिए सैटेलाइट फोन का इंतज़ाम हो सके और साथ ही उन्हें बताया कि अगर चीन सहायता(भीख) न दे तो अगली फ्लाइट पकड़कर अमेरिका रवाना हो जाये ।
पाकिस्तान सरकार के इस कदम से समाजसेवी मौलाना अजहर बहुत खुश है और कहा – “इससे पता चलता है कि पाक सरकार हमारे नापाक इरादों के लिए कितना योगदान देती है और इंसा अल्लाह! अब कश्मीर में भी जम्हूरियत और इंसानियत खूब तरक्की करेगी , इसी के साथ दो हज़ार के नकली नोटों की सूटकेस कश्मीरी भाइयो के लिए अपने खास आदमी को श्रीनगर भिजवा दिए जिससे कि पत्थरबाजी के ना’पाक कार्य मे कोई रुकावट न आये ।

#Satire #JustForFun #FakeNews

Satire

राहुल गांधी - कांग्रेस के लिए अभिशाप या वरदान?

आज का सवाल: भारत की सबसे पुराने राजनैतिक दल भारतीय राष्ट्रिय कांग्रेस के शीर्ष नेत्रित्व एवं सबसे पुराने राजनैतिक परिवार गांधी-नेहरु परिवार के वंशज राहुल गांधी, क्या वे कांग्रेस के लिए वरदान हैं या अभिशाप?

पहले राहुल गांधी का संक्षिप्त परिचय, राहुल गांधी भारत के पहले प्रधानमंत्री एवं वर्तमान भारत के संस्थापक पंडित जवाहर लाल नेहरु के प्रपौत्र, भारत की एक मात्र महिला प्रधानमंत्री. आयरन लेडी के नाम से विख्यात इंदिरा गाँधी के पौत्र, भारत के सबसे युवा प्रधानमंत्री, भारत को तकनीकी क्षेत्र में विश्व में आयाम देने वाले राजीव गांधी हैं. २४ वर्ष की आयु में आतंकवादियों द्वारा दादी इंदिरा गांधी एवं ३१ वर्ष की आयु में पिता की आतंकवादियों द्वारा हत्या किये जाने के पश्चात, राहुल गांधी को सुरक्षा कारणों से अपनी पहचान गुप्त रख छद्म नाम से शिक्षा पूर्ण करने पर विवश होना पड़ा.

पिता के समान ही वर्षों तक राजनैतिक सुर्ख़ियों से दूर रहने के पश्चात २००४ में राहुल गांधी ने राजनीति में प्रवेश का निर्णय लिए. ये वो वक्त था जब उनकी माँ सोनिया गांधी ने कांग्रेस को नेपथ्य में जाने से बचा कर सत्ता में  पुनः वापसी दिलाई. २००४ के चुनाव में राहुल गांधी पहली बार संसद पहुंचे.

राहुल गाँधी ने पारंपरिक राजनीति से अलग राजनीति का मार्ग चुना, उन्होंने अपनी राजनीति को संसद से अधिक उन उपेक्षित परिवारों से आरम्भ किया, गाँवों में दलितों एवं किसानों के घरों में भोजन कर, रात बिता, उन्होंने ये साबित किया की वे ख़ास परिवार से  होने के बावजूद आम आदमी हैं, एवं आम आदमी का दर्द समझते हैं, और ये बुंदेलखंड से ले कर भट्टा परसौल तक साबित हुआ.

राहुल गांधी एक नयी सोच के साथ भारतीय राजनीति में अपना स्थान बनाने लगे. मगर उनकी इस नयी सोच का भारतीय रूढ़िवादी राजनीति में भय व्याप्त हो गया. भारत के अधिकांश राजनैतिक धुरंधरों ने उनके इस प्रयास को विफल बनाने का बीड़ा उठा लिया. जहाँ उनके स्वयं के दल के नेताओं ने उनके हर प्रयास को विफल बनाने का बीड़ा उठाया वही उनके प्रतिपक्षी दलों ने उनके चरित्र हनन एवं व्यक्तिगत आक्षेपों का सहरा लिया, उनके सलाहकारों ने या तो उन्हें गलत सलाह दी या राजनितिक सुयोग को सही समय पर नहीं भांपा.

प्रतिपक्षी और विशेष कर भारतीय जनता पार्टी एवं उससे जुड़े संगठनों ने अनेकों ऐसे चालों का सहारा लिया जिसे किसी भी सभ्य एवं परिपक्व लोकतंत्र में उचित नहीं ठहराया जा सकता, कभी उनकी शिक्षा पर उंगलियाँ, कभी उनके सुरक्षा कारणों से धारण किये गए छद्म नाम से उन्हें इटली का नागरिक साबित करने प्रयत्न, कभी तस्वीरों में छेड़छाड़ कर उनके परिवार को भ्रष्ट बताने का प्रयत्न तो कभी उनकी माँ पर अनर्गल एवं ऐसे घृणित आरोप, जिनका मैं अपने ब्लॉग में उल्लेख भी नहीं कर सकता.

हद तो तब हो गयी जब उनपर झूठा बलात्कार का आरोप लगाया गया, जिसे स्थानीय न्यायालयों से ले कर उच्चतम न्यायालय तक ने नकार दिया, यही नहीं याचिकाकर्ता पर झूठे आरोप लगाने एवं चरित्र हनन के प्रयत्न पर जुर्माना भी लगा दिया. परन्तु इन दक्षिणपंथी दलों के प्रयास रुके नहीं, अनेकों संघ समर्थन वाली वेबसाइट पर इस झूठे आरोप को जोर शोर से उठाया गया. मूल रूप से इन दलों ने “झूठ बोला, जोर जोर से बोला, तब तक बोला जब तक कुछ लोग उस झूठ को सच नहीं मान सके”.

एक स्वस्थ राजनीति की शुरुआत करने वाले राहुल गांधी की राजनीति उनके स्वयं के दल को भी पसंद नहीं आई, दशकों से सत्ता एवं शक्ति का सुख भोग रहे, कांग्रेस के बड़े नेताओं को राहुल गांधी की नयी राजनीति से अपनी व्यक्तिगत सत्ता खिसकती नजर आई, इसी कारण इन्होने राहुल गांधी के हर प्रयास को विफल किया.

राहुल गांधी ने कांग्रेस में बदलाव का आगाज करते हुए आतंरिक चुनावों की घोषणा की, कांग्रेस के कुछ संगठन इसका पालन भी करते नजर आये, परन्तु इस प्रयोग को कांग्रेस के ही तथाकथित वरिष्ठ जनों ने विफल कर दिया. प्रदेशों में राहुल गांधी की पसंद के युवा नेताओं को अध्यक्ष बना कर एकाधिकार देने के प्रयत्नों को विफल कर दिया गया. चुनाव दर चुनाव हारने का बाद भी प्रदेश अध्यक्षों को नहीं बदल पाए राहुल गांधी.

राहुल गांधी कांग्रेस में एक नयी परंपरा का आरम्भ करने का प्रयास भी हार गए. राहुल गांधी ने कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को चुनावों में उम्मीदवार चुनने का अधिकार (primaries) देने का प्रयास किया परन्तु वो भी विफल.

ऐसा नहीं की राहुल गांधी ने राजनैतिक गलतियाँ नहीं की, चुनाव प्रचार में कांग्रेस की उपलब्धि और भविष्य की दिशा बताने से अधिक प्रधानमंत्री नरेंद मोदी की आलोचना एवं आरोप पर अधिक निर्भरता, निर्णय लेने में देरी एवं अक्षमता, अन्ना हजारे के नेत्रित्व वाले लोकपाल कानून के समर्थन एवं भ्रष्टाचार विरोधी जन आन्दोलन को सही समय एवं सही तरीके से नहीं नियंत्रण नहीं कर पाना जैसी अनेक विफलताएं उनके ही खाते में हैं.

जी नहीं, राहुल गांधी कांग्रेस के लिए अभिशाप नहीं हैं, बल्कि राहुल गांधी वर्तमान में कांग्रेस की निति, कांग्रेस की विचारधारा, कांग्रेस की दिशा को जीवित रखने की क्षमता रखने वाले एक मात्र कांग्रेस नेता हैं, कांग्रेस के लिए अभिशाप हैं वो कांग्रेसी जो कांग्रेस में रह कर कांग्रेस को दीमक की तरह खोखला कर रहे हैं. वो कांग्रेस नेता जो कांग्रेस के अधिक स्वयं के विषय में सोच रहे हैं.

राहुल गांधी पर लगातार हो रहे बेबुनियाद हमलों का जवाब देने में कांग्रेस के प्रवक्ता एवं नेता पूर्णतः विफल रहे. गांधी परिवार एवं राहुल गांधी की भक्ति में लीन कांग्रेस के अति उत्साही युवा कांग्रेसीयों ने राहुल भक्ति में तो कोई कसर नहीं छोड़ी मगर राहुल गांधी को हंसी का पात्र एवं पप्पू के नाम से विख्यात होने से नहीं रोक पाए.

हालाँकि राहुल गांधी की ये गलती तो है की वो ऐसे स्वार्थी तत्वों को कांग्रेस की मुख्यधारा से अलग नहीं कर पा रहे हैं, अति उत्साही कांग्रेस के युवा समर्थकों को सही दिशा नहीं दे पा रहे हैं. कांग्रेस का वर्तमान एवं भविष्य राहुल गांधी पर तो है वे अकेले कुछ नहीं कर सकते जब तक कांग्रेस में जिम्मेदार पदों पर आसीन नेता सही दिशा नहीं पकड़ेंगे. अब समय आ गया है की सबकी जिम्मेदारी तय की जाए और उस जिम्मेदारी का हिसाब हो. पुरस्कार और जुर्माना प्रणाली (Reward and Penalty system) अमल की जाए.

Politics

​बिहार के बाद अब यूपी में भी शराब बंद, पूरे यूपी में हड़कंप ! 

अपने फैसलों (बंध) से चर्चित योगी ने एक बार फिर यूपी की जनता को चौंका दिया , आज से यूपी में शराब बन्द हो जाएगी, साथ ही हनी सिंह, बादशाह और अन्य रैपर के गाने भी यूपी में नही बज पाएंगे ।
पान मसाला और गुटखा के बैन के बाद यूपी सरकार के कर्मचारियों का एक मात्र साधन शराब ही बचा था, सुबह सुबह ही टल्ली होकर आफिस आए बच्चा सिंह यादव को जब हमने ये खबर सुनाई तो उनकी एक सेकंड में ही उतर गई और खीजते हुए बोले – “हम पहले ही बताए थे इन बाबा और योगियों से सरकार नही चलती है, पहले पान मसाला और अब शराब, एक आम आदमी कहाँ जाए अब, इससे अच्छा तो पुत्तर और बुआ थे जो खुद भी और हमे भी … ” कहते कहते गला फाड़कर रोने लगे ।

जब हमने ग्यारसीलाल (एन्टी रोमियो स्क्वाड के सदस्य) से इस बारे में पूछा तो बताया कि ” देखो बाबा को तो कुछ काम है नही पूरे दिन गांजे में लीन रहते है और हमारे पेट के ऊपर लात मार दिए हैं, हमरा पहले आबकारी विभाग में तैनात थे तो सोचे एक दो ठो बच्चे पैदा कर ही लें लेकिन अब लग रहा है हमसे नही हो पायेगा ।”
जब इस बारे में शराब दुकान संचालक से पूछा तो उन्होंने बताया – “पान मसाला और गुटखा तक तो ठीक है लेकिन शराब बंद करना नामुमकिन है क्योंकि थानों /सरकारी कार्यलयों/ फार्म हाउस/ कोठियों के जलसे बिना शराब/शबाब/कबाब के अधूरे है , उसके बिना तो आधा यूपी कभी आनंद ही नही लेगा, ये कहते कहते पान के पीक से मोनालिसा बनाने की कोशिश करते हुए सड़क पर पीकदान कर दिया।”

जब सूत्रों ने विपक्ष से इस फैसले के बारे में प्रतिक्रिया देने को कहा तो भड़कते हुए उन्होंने कहा – “हमारे नेताजी और उनके पुत्तर ने हमेशा यूपी का ख्याल रखा ऐसे समाज सुधार के निर्णय कभी नही लिए, चाहे उसके लिए चुनाव ही क्यों न हार गए, ये कहते कहते पव्वे से दो घूट मार ही ली, फिर बोले पता नही कब आगे पीने का मौका मिले या न मिले ।

जब बुआ से बात करने की कोशिश की तो उन्होंने बताया कि “आपका बहुत आभार क्योंकि चुनाव के बाद उन्हें कोई सीरियसली नही ले रहा है, ये सब कमबख्त EVM का दोष है जिसने इतना दलित विरोधी काम किया है” ये कहते कहते बुआ दहाड़े मार के रोने लगी, जब किसी ने बताया कि आज का ‘इंतजाम’ हो गया है तब जाके वो शांत हुई, हमारे सूत्र भी जैसे तैसे सुनामी से बचकर भाग खड़े हुए ।
इसी बीच खबर मिली कि पतंजलि एक पेय पदार्थ पर काम कर रहा है जो पूरी तरह से स्वदेशी और शाकाहारी होगा जिससे शरीर को कोई नुकसान नही होगा और लोगों को शराब जैसा आनंद मिलेगा, जल्द ही इस बारे में बाबा प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे ।
गुप्त सूत्रों से पता चला है कि पतंजलि को योगी सरकार ने शराब जैसा पेय पदार्थ  बनाने के लिए ठेका भी दिया है ।

Satire