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for the love of reading

I just read this article about cultivating a love of reading in your children.

Steps for Cultivating A Love of Reading in Young Children

It is one of my favorite things I’ve read on the topic and this is why: it made  430 more words

Hippo

Engaging Intermediate Elementary Students in Reading

For this post I am not going to list a number of strategies that one could participate in with 6th-8th grade students to engage them in reading. 173 more words

Strategies Good Readers Use

Reflector hosts students to Reading and Leadership Summit

By Ebizimo Freeman

A one-day Young Readers and Leaders Summit was held in Yenagoa recently with a call on participating students to focus on reading and thinking positive actions for the development of Bayelsa State as well as shun social vices. 665 more words

Bayelsa State

REGAGGING THE NIGERIAN PRESS, THE HANDWRITING ON THE WALL?

The initiation of the regulatory bill on social media reportage as an evolved type of the mass media by virtue of the overwhelming influence of the Internet with its global presence, breaking the barriers hitherto existing in news gathering and dissemination can be worrisome to the teeming Nigerians who can see the handwriting on the wall of a subtle intention to bring Nigeria back to the military days of the democratically-elected President Muhammadu Buhari. 1,051 more words

Politics

लायब्रेरी फॉर आलः सभी बच्चों के लिए होनी चाहिए अच्छी लायब्रेरी

भारत की विशालता और विविधता की मिशाल दी जाती है। मगर देश में सबके लिए पुस्तकालय का मुद्दा कोई पार्टी नहीं उठाती। कोई नेता यह क्यों नहीं कहता कि देश में पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देंगे। स्कूल जाने के लिए साइकिल दे रहे हैं, लेकिन केवल साइकिल, स्कूल की ड्रेस और स्कूल की किताबें देना पर्याप्त नहीं है, इन छात्र-छात्राओं को किताबों की दुनिया से भी रूबरू कराना जरूरी है ताकि वे खुले मन से दुनिया को जानने-समझने का प्रयास कर सके।

हमारे देश में बच्चों को किताबों से दोस्ती करने का मौका मिलना चाहिए। मगर उनको तो सवाल रटने वाला तोता बनाने वाली व्यवस्था को पोषित करने का काम हो रहा है। बाकी रही-सही कसर पासबुक और गाइड्स कर देती हैं, इनका करोड़ों का कारोबारा है। उनको आने वाली पीढ़ी की भला क्यों परवाह होगी की उनके भीतर पढ़ने का कौशल और पढ़ने की आदत का विकास हो रहा है या नहीं। उनको तो बस अपने मुनाफ़े से मतलब है।

सरकार बदलने के साथ ही किताबों में बदलाव की कवायद शुरू हो जाती है। कभी इतिहास बदला जाता है। तो कभी भूगोल में बदलाव की कोशिश होती है। तो कभी ख़ास लोगों को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाता है। तो शेष लोगों को महत्वहीन बताकर बाहर का रास्ता दिखाने की कोशिश होती है।

इस दौर की सच्चाई यही है कि बिना पाठ्य किताबों और संदर्भ पुस्तकों के होने वाली पढ़ाई बस डिग्री बटोरने के काम आती है, इस बात को स्वीकारने में कोई हर्ज नहीं है। अन्य देशों में पढ़ने की संस्कृति विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया जाता है। परिवार में बच्चों को पढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। मगर हमारे यहां तो उल्टे लेखकों पर हमला करने की संस्कृति विकसित की जा रही है। उनको अपनी ही अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की गुहार लगाते हुए देश की राजधानी में विरोधी प्रदर्शन करना पड़ रहा है।

पढ़ने की संस्कृति का एक डर तो वास्तव में है। अगर लोग पढ़ने-लिखने लगे। अपने पाँवों पर खड़े होकर सोचने लगे। तो उन सड़ी-गली मान्यताओं के लिए सिर छिपाने की जगह खोजनी मुश्किल हो जाएगी जिनके कारण हम एक ऐसा समाज बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, जो अफवाहों पर यक़ीन करता है। लिखी हुई बातों को पत्थर की लकीर मानकर चलता है, लोगों की कहीं हुई बातों पर सवाल करने की जरूरत नहीं समझता।

जो सिर्फ़ लोगों से सुनता है। सुनी-सुनायी बातों को दोहराता है। और उनसे बनी राय से अपनी ज़िंदगी को आगे ले जाता है। वह रास्ता सही है या ग़लत है, उसे इस पर विचार करने की जरूरत भी नहीं महसूस होती है। यह एक ऐसे समाज की निशानी है, जो बैसाखियों पर चलने की कला सीख रहा है। एक बार उसे इस कला में महारत हासिल हो गई तो वह अपने पांवों पर खड़ा होकर सोचने और अपनी कल्पनाओं को पंख लगाकर उड़ने का हौसला खो देगा।

लायब्रेरी

PICTURES OF THE DAY: ... JUST PONDERING

I live for the day we’ll be blessed to have a Modern Library in my city and a Museum. We are so influenced by the west with a KFC and Dominos Pizza, ColdStone with Movie theatres etc but we could also invest in a Massive Beautiful building containing collection of books, encyclopedia, periodicals, novels etc. 76 more words

Entertainment

I’ll bring fun into ANA activities, Says Afenfia

Michael Afenfia is a renowned author of three books. He was recently elected as the chairman of the Association of Nigerian Authors, (ANA) as well as Patron, Yenagoa Book Club, (YBC). 1,951 more words

Bayelsa State