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पूजा नहीं मानवीयता ऐच्छिक है

यत्र नार्यन्तु पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवता 

बहुत से ज्ञानी और उदारह्रदय गुणीजन अक्सर महिलाओं के पक्ष में बात करते समय उपरोक्त श्लोक का प्रयोग करते हैं । जब भी कहीं कोई महिला सशक्तिकरण का मोर्चा सम्भाल रहा हो तो दुर्गा, काली, सरस्वती, लक्ष्मी और सीता का उदाहरण दिया जाता है । यह सारी चर्चा पूरी तरह से mythological है । आज के युग में, ना कोई देवताओं को मनाता है, ना पूजा को मनाता है और ना ही उसे इन mythological व्यक्तित्वों के धरती पर अवतरित होने की कोई कल्पना भी है । ऐसे में महिलाओं को प्रेरित करने, आत्म-ज्ञान और स्वयं शक्ति के परिचित कराने के लिए ऐसे उदाहरण कारगर है या हास्यापद हैं, इस पर मैं कोई टिपण्णी फिलहाल नहीं करुँगी । मगर मैं जब भी ऐसा कुछ सुनती और पढ़ती हूँ तो मन में एक प्रश्न अनायास ही दस्तक देता है – … 18 more words

Evaluation

My first encounter with reality distortion-1

Steve Jobs had a phenomenal reality distortion field as shown in the documentaries made on him and his biography also claims this. While reading, watching, and thinking about Steve Jobs, I always paid more attention to his urge for perfection, his brilliance, his struggles, his travels, his family, and his relationships with his co-workers. 477 more words

Story