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Summer Regrets

Daddy loved me like an afternoon TV commercial,

like ice cream licked from the bottom of a bowl

when no one’s looking, his tongue searching… 132 more words

Poetry

Haunted

Looks like I’m back to writing poetry after a number of years doing other things, and having my min sorted in other methods, but I find my self needing to write again, so it might as well get posted again. 55 more words

Poetry

काश एक बार...

तुम्हे खोकर जाना खोना किसे कहते है
पल पल तड़प कर जाना मरना किसे कहते है
गलती की सज़ा ये है की अब तुम साथ नही हो
अब ये भी पता है की तुम किसी और के साथ खुश हो
बस इतना लगता है की काश ज़िंदगी हमारे प्यार को दूसरा मौका दे देती
की मैं अपनी गलतियाँ सुधार सकती
पर गलतियों के पहाड़ को तोड़ना है मुश्किल
ना साथ रहने के चाह को बदलना है मुश्किल
अब खुश होती हूँ ये सोचकर की तुम्हे किसी और की बाहों में पनाह मिला
किसी और के साथ वो मुकम्मल जहाँ मिला
बस यही सोचती हूँ रोज़ की तुम खुश हो की नही
प्रार्थना करती हूँ की खुश तो होंगे ही ज़रूर
अब बस यही लगता है की तुमसे बात न बनी तो किसी और से ना बन पाएगी
प्यार खोकर जाना प्यार कहते किसे है…
काश तुम एक बार मुड़कर मेरी तरफ देखते
काश हम एक बार पुरानी बातें भुला देते
पर अब बस काश ही बोलती रहूंगी
क्यूंकी अब ना नसीब होगी मुझे तुम्हारी मुहब्बत या नफ़रत
अब पता है की तुम्हारे अंदर मेरे लिए कोई भावनायें नही
होंगी भी कैसे, मैं हूँ ही ऐसी बला
जिसे छोड़कर तुम आज खुश हो
बस यही बोलती हू भगवान को रोज़ की मैने गलतियाँ मान ली है
पर पता है अब सुधारने का मौका नही मिलेगा…
रोज़ कोशिश करती हूँ तुम्हे भूलने की ताकि तुम खुश रहो
पर प्यार को भूलना मुश्किल ही नही
नामुमकिन है,
अब बस तुम्हारे उस खत का इंतेज़ार है
जिसमें तुम मुझे अपनी शादी में बुलवाओ
ताकि मैं आकर तुम्हे खुशियों की बधाई दे सकूँ
क्यूंकी तुम्हारी खुशियाँ बस चाहिए अब मुझे
मुझे अपने अंदर के शैतान को किसी और को ना दिखाना
किसी और को दर्द नही देना
ना किसी और के साथ ग़लतियाँ करनी
क्यूंकी तुम्हारे साथ बात नही बनी
तो किसी के साथ नही बनेगी…
तुम्हारे सामने खुश होने का नाटक करूँगी
ताकि तुम मुझे भूल जाओ और खुश रहो
तुम्हे अब ना कॉल ना message करूँगी
मेरी मनहूस शकल से भी तुम्हे घिन आती है, ये पता है
अब तुमसे ना कोई चाह ना गिला
बस अपने आप को रोज़ बोलती हूँ
की काश प्यार को पहले समझा होता
तो शायद आज तुम्हारे बिना जीना नही पड़ता
शायद पहले ये समझा होता की प्यार में कोई समझौता नही होता
तो शायद इस दिन को ना गले लगाना पड़ता…
अब भगवान से बस यही माँगूंगी
की अगले जनम हम साथ हो
मैं तुम्हारे साथ जियुं और तुम्हारे बाद मरूं
क्यूंकी सच कहूँ
तुम्हारे बिना जीना बहुत मुश्किल है…
काश ज़िंदगी ने हमारे प्यार को एक और मौका दिया होता
काश मैने अपने आप को रोका होता
काश ये दिन ना आता
काश मैं जी पाती तुम्हारे बिना
अब बस मरने की देर है
तुम्हारे बिना साँस लेती हूँ पर अपने आप से घिन है
जी तो लूँगी मैं अकेले
क्यूंकी अब बस अगले जनम का इंतेज़ार है
जब हम सच में साथ हो और ये गलतियों का पहाड़ ना हो
इस जनम से अगले जनम में ज़्यादा वक़्त नही
८० साल तो बस समय है, ज़िंदगी नही…

Life

Self-Condemnation Over those Who Don't Wanna Fight for themselves.........

Fighting for a person whom you think you’re connected through invisible rope, they are already dead but you still have a hope. Rather than ever you seen a farmer cutting immature crop. 324 more words

THE BLACK COFFEE

PART: I

“not more than the fact that tomorrow morning it will be rain and someone else.”

Black coffee on the bed table, smudged eyeliner on her intoxicated eyes, rainy morning on earth, messy hair on her head… it was a cold morning. 399 more words