Tags » Religious Tolerance

Gratitude to President Obama

One citizen says goodbye…

Today I found myself mourning the loss of Barack Obama as our President and Commander-in-Chief. It was not an intellectual experience, but an emotional one. 1,222 more words

Sri Chinmoy Disciple Experience

Pakistan and the Rise of Barelvi Sunni Extremism

01/09/2017

Kashif N Chaudhry Physician, Writer, Human Rights Activist

This post is hosted on the Huffington Post’s Contributor platform. Contributors control their own work and post freely to our site. 892 more words

Asia

Fighting intolerance a challenge for Indonesia's moderate Muslims

  • Jewel Topsfield
  • Karuni Rompies

Jakarta: Permadi Arya became famous – or infamous, depending on how you look at it – for his satirical YouTube videos lampooning extremism. 176 more words

Asia

Christmas: a miracle of understanding

As a Pagan in a, generally, Christian household I’ve had to accept that there are certain things I can’t do, certain things I have to tolerate, and certainly things I have to here. 409 more words

Polytheism

Evening Prayer 12.27.16, St. John, Apostle & Evangelist

And this is the testimony: God gave us eternal life, and this life is in his Son.

Behold, I bring you good news of a great joy which will come to all the people; for to you is born this day in the city of David, a Savior, who is Christ the Lord. 2,055 more words

Jesus

धार्मिक सहिष्णुता

क्रमांक- 15– जब किसी भी धर्म के लोग अन्य धर्मों के तीज-त्यौहारों पर उन धर्मों के मित्रों/ लोगों को अथवा अपने ही धर्म के मित्रों/लोगों को शुभकामना देते है् या फिर उन त्यौहारों को मनाते हैं तो ऐसा करने वाले लोगों के धर्म के तथाकथित धर्मरक्छक अपनी क्छयकारक व रूढ़िवादी सोच का पिटारा और ढोल लिए डुगडुगी बजाते फिरते हैं कि ऐसा करना उनके धर्म, संंस्कृति और सभ्यता के विरुद्ध हैऔर इससे उनका समाज कमजोर बनेगा. वह इस कोशिश में दूसरे धर्म की बुराईयों को गिनाने लगते हैं.
वह शायद यह नहीं जानते कि मानव सभ्यता के विकास की मँज़िल किसी देश, धर्म या समाज की परिधि के अन्दर सीमित नहीं है. उसकी मंज़िल तो इन सीमाओं से परे यहाँ तक कि धरती की सीमा को भी लाँघकर ब्रह्माण्ड में किसी अकल्पित बिन्दु तक है.
‘ प्रेम’ शाश्वत ब्रह्म है. प्रेम वह है जो अपनों, प्रिय लगने वालों से ही नहीं बल्कि पराए, अप्रिय और यहाँ तक कि वैरी से भी किया जा सके. प्रेम के बिना विश्वबन्धुत्व की धारणा पूरी और मानवीय विकास नहीं हो सकता.
इसलिए मानवीय विकास के लिए जरूरी है कि देशों, धर्मों एवं समाजों में समरसता हो. लोग आपस मे घुलें-मिलें.एक दूसरे की संस्कृति व सभ्यता , खान-पान को जानें समझें. तीज-त्यौहारों को मनाएं.
इससे कोई भी धर्म,संस्कृति और सभ्यता कमजोर नहीं होगी वरन एक-दूसरे की अच्छाईयों का अनुभव कर और निज की कमियों को त्याग कर, भौगोलिक सीमाओं को लाँघती , विश्वस्तरीय, एक नवीन , सृजनात्मक संस्कृति और सभ्यता का निर्माण करने में हम सहायक होंगे जो कि मानवीयता के सतत् विकास के लिए आवश्यक ही नहीं बल्कि अपरिहार्य है..

Manav Chetna

The magic and solidarity of celebrating Christmas in a 95%-Muslim country

Dakar, Senegal

This time of year, when you take a walk in the streets of Dakar—the capital city of Senegal, that is 92%-95% Muslim in one of the hottest parts of the world, you stumble upon decorated snowmen, Christmas trees with cotton snowballs, traditional masks covered in Christmas lights. 1,046 more words