Tags » Rights And Duties

River deep, Mountain high

Not sure if this is an under-statement but so many struggles in human life seem too irrelevant when seen through different tinted shades. In my country right now, there is a huge debate, newspapers filling their columns and eminent writers, public personalities moaning over political judgements and chaos ensuing in society over nationalism and anti-nationalism, sedition and loyalty to the religion major. 426 more words

Society

Days of Destruction?

While testing myself for some administrative exams, I stumbled upon the following statement-
A ‘norm’ is a shared expectation or behaviour that connotes to what is considered culturally desirable and appropriate. 619 more words

Society

A Festive Soliloquy

Festivals have ceased to make me happy since a couple of years. They don’t carry the same innocence and excitement any more. And since India is a nation that celebrates culture and life so vivaciously, it’s weird to feel this way about culture. 626 more words

Society

Truth Alone Prevails

Wow, going by the hate barrage I’m subjected to and almost being deemed as a fanatic on facebook for voicing my dissent against capital punishment, I would say- We have such a long journey to make towards being a civil society. 544 more words

Society

Quran Chap-2 Surah Al Baqer:1 to 5

Quran Chap-2 Surah Al Baqer:1 to 5

…..अलीफ़॰ लाम॰ मीम॰ (1) वह किताब यही हैं, जिसमें कोई सन्देह नहीं, मार्गदर्शन हैं डर रखनेवालों के लिए, (2) जो अनदेखे ईमान लाते हैं, नमाज़ क़ायम करते हैं और जो कुछ हमने उन्हें दिया हैं उसमें से कुछ खर्च करते हैं; (3) और जो उस पर ईमान लाते हैं जो तुम पर उतरा और जो तुमसे पहले अवतरित हुआ हैं और आख़िरत पर वही लोग विश्वास रखते हैं; (4) वही लोग हैं जो अपने रब के सीधे मार्ग पर हैं और वही सफलता प्राप्त करनेवाले हैं (5)…… 80 more words

Chap 2 Al Baqra

Quran Chap-2 Surah Al Baqer:40 to 46

Quran Chap-2 Surah Al Baqer:40 to 46

…..ऐ इसराईल की सन्तान! याद करो मेरे उस अनुग्रह को जो मैंने तुमपर किया था। और मेरी प्रतिज्ञा को पूरा करो, मैं तुमसे की हुई प्रतिज्ञा को पूरा करूँगा और हाँ मुझी से डरो (40) और ईमान लाओ उस चीज़ पर जो मैंने उतारी है, जो उसकी पुष्टि में है, जो तुम्हारे पास है, और सबसे पहले तुम ही उसके इनकार करनेवाले न बनो। और मेरी आयतों को थोड़ा मूल्य प्राप्त करने का साधन न बनाओ, मुझसे ही तुम डरो (41) और सत्य में असत्य का घाल-मेल न करो और जानते-बुझते सत्य को छिपाओ मत (42) और नमाज़ क़ायम करो और ज़कात दो और (मेरे समक्ष) झुकनेवालों के साथ झुको (43) क्या तुम लोगों को तो नेकी और एहसान का उपदेश देते हो और अपने आपको भूल जाते हो, हालाँकि तुम किताब भी पढ़ते हो? 286 more words

Chap 2 Al Baqra

Quran Chap-2 Surah Al Baqer:82 to 83

Quran Chap-2 Surah Al Baqer:82 to 83

….. रहे वे लोग जो ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए, वही जन्नतवाले हैं, वे सदैव उसी में रहेंगे।” (82) और याद करो जब इसराईल की सन्तान से हमने वचन लिया, “अल्लाह के अतिरिक्त किसी की बन्दगी न करोगे; और माँ-बाप के साथ और नातेदारों के साथ और अनाथों और मुहताजों के साथ अच्छा व्यवहार करोगे; और यह कि लोगों से भली बात कहो और नमाज़ क़ायम करो और ज़कात दो।” तो तुम फिर गए, बस तुममें से बचे थोड़े ही, और तुम उपेक्षा की नीति ही अपनाए रहे (83)….. 114 more words

Chap 2 Al Baqra