Tags » Romantic Poem

धूप के टुकड़े

मेरे कमरे की बालकनी में,

एक आम के पेड़ का पर्दा सा लटकता है,

मैं अक्सर उसकी पत्तियों की,

चिकनाहट महसूस करता रहता हूँ,

इक दिन कोहरा बरसा था आसमां से,

ठण्ड इतनी थी उन पत्तियों पर जमकर बैठ गया,

मैंने भी मजे मजे में

उन पत्तियों पर तुम्हारा नाम लिख दिया था

क्यूंकि

मैं आश्वस्त था कि इतने कोहरे में

बाहर निकलकर कोई नहीं देखेगा,

कुछ देर बाद एक जालिम धुप का टुकड़ा टपका कहीं से,

और तुम्हारे नाम के साथ पिघल गया उस कोहरे में,

और टपकने लगा पत्तियों से,

जैसे टपके थे तुम्हारे आंसू,

जब हमारे दरमियाँ कुछ धुप के टुकड़े आया गये थे|

POETRY

I Wait For You

Every day, I’d save my best stories for you.

In my head, it always plays

with your unwavering gaze

And you’d find me interesting again. 80 more words

Love Poems

On the road - Jofkin

The day I started to feel love was the day I realised she was an imaginary person.

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On the road

                                           – Jofkin.

The war begins… 110 more words

Lyrist

If - Jofkin.

  This is a piece of many poems that I’ve been reciting.

In a long night, with away lounge, I was lovesick and immersing deeply in your picture. 115 more words

Lyrist

Chiều Qua Đồi Lá Mục. Thơ Hư Vô

(Tranh sơn dầu trên plastic của Đinh Cường)

Chiều qua đồi lá mục
Hụt hẫng bước chân tôi
Giữa trời cùng đất lụn
Không thấy một bóng người. 153 more words

Thơ

Tự Tình Tan. Thơ Hư Vô

Vịn buồn uống cạn dòng sông
Nghe trong nhịp thở còn nồng hương em
Nửa chừng tôi bỗng hụt chân
Từ khi em bước nghênh ngang vào đời. 143 more words

Thơ

"एक बरस और"

बालम मोसे रूठ के,

जब से तू परदेस गया!
याद में तेरी देख मेरा,
एक बरस और बीत गया!

सावन आया सूखा-सूखा,
चमन हाय! रे रूठ गया,
याद में तेरी देख मेरा,
एक बरस और बीत गया!

तुझ बिन न चमके रे सूरज,
चाँद गगन से टूट गया!
याद में तेरी देख मेरा,
एक बरस और बीत गया!

अब न बोले पायल मेरी,
कंगन का खनखना छूट गया!
याद में तेरी देख मेरा,
एक बरस और बीत गया!

अब तो न कोई सखी-सहेली,
माँ-बाप का दामन दूर गया!
याद में तेरी देख मेरा,
एक बरस और बीत गया!

बिखरे-बिखरे गेसू मेरे,
कजरा अखियों से धुल गया!
याद में तेरी देख मेरा,
एक बरस और बीत गया!

धुंधला-धुंधला हर दरपन है,
बन यौवन मेरा धूल गया!
याद में तेरी देख मेरा,
एक बरस और बीत गया!

आग उगलते तारे हैं,
हर फूल बन अब शूल गया!
याद में तेरी देख मेरा,
एक बरस और बीत गया!

बालम मोसे रूठ के,
जब से तू परदेस गया!
याद में तेरी देख मेरा,
एक बरस और बीत गया!

(आग़ाज़)

Abstract Poem