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Bojh uthhaa le saathhi bojh uthhaa le

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Yearwise Breakup Of Songs

ये ज़ुल्फ़ अगर खुल के बिखर जाए तो अच्छा - Ye Zulf Agar Khuk Ke (Kajal)

फ़िल्म: काजल / Kaajal (1965)
गायक/गायिका: मोहम्मद रफ़ी
संगीतकार: रवि
गीतकार: साहिर लुधियानवी
अदाकार: धर्मेंद्र, मीना कुमारी, पद्मिनी, राज कुमार

ये ज़ुल्फ़ अगर खुल के बिखर जाए तो अच्छा
इस रात की तक़दीर सँवर जाए तो अच्छा
ये ज़ुल्फ़…

जिस तरह से थोड़ी सी तेरे साथ कटी है
बाक़ी भी उसी तरह गुज़र जाए तो अच्छा
ये ज़ुल्फ़…

दुनिया की निगाहों में बुरा क्या है भला क्या
ये बोझ अगर दिल से उतर जाए तो अच्छा
ये ज़ुल्फ़…

वैसे तो तुम्हीं ने मुझे बर्बाद किया है
इल्ज़ाम किसी और पे आ जाए तो अच्छा
ये ज़ुल्फ़…

1960s

समझी थी के ये घर मेरा है - Samjhi Thi Ki Ye Ghar Mera Hai (Kajal)

फ़िल्म: काजल / Kaajal (1965)
गायक/गायिका: आशा भोंसले
संगीतकार: रवि
गीतकार: साहिर लुधियानवी
अदाकार: धर्मेंद्र, मीना कुमारी, पद्मिनी, राज कुमार

समझी थी के ये घर मेरा है
मालूम हुआ मेहमान थी मैं
हो जिन्हें अपना-अपना कहती थी
हो उन सबके लिये अनजान थी मैं

इस तरह न मुझको ठुकराओ
इक बार गले से लग जाओ
हाय मैं अब भी तुम्हारी हूँ लोगों
रूठो न अगर नादान थी मैं

मेरा खोया हुआ बचपन ला दो मुझे
क्या दोष हुआ समझा दो मुझे
वो होंठ भी ना क्यूँ कहते हैं
जिन होंठों की मुस्कान थी मैं

तुम शाद रहो आबाद रहो
अब मैं तुम सबसे दूर चली
हाय परदेस बनी हैं वो गलियाँ
जिन गलियों की पहचान थी मैं

1960s

तोरा मन दर्पण कहलाये - Tora Man Darpan Kehlaaye (Kajal)

फ़िल्म: काजल / Kaajal (1965)
गायक/गायिका: आशा भोंसले
संगीतकार: रवि
गीतकार: साहिर लुधियानवी
अदाकार: धर्मेंद्र, मीना कुमारी, पद्मिनी, राज कुमार

प्राणी अपने प्रभु से पूछे किस विधी पाऊँ तोहे
प्रभु कहे तु मन को पा ले, पा जयेगा मोहे

तोरा मन दर्पण कहलाये – 2
भले बुरे सारे कर्मों को, देखे और दिखाये
तोरा मन दर्पण कहलाये – 2

मन ही देवता, मन ही ईश्वर, मन से बड़ा न कोय
मन उजियारा जब जब फैले, जग उजियारा होय
इस उजले दर्पण पे प्राणी, धूल न जमने पाये
तोरा मन दर्पण कहलाये – 2

सुख की कलियाँ, दुख के कांटे, मन सबका आधार
मन से कोई बात छुपे ना, मन के नैन हज़ार
जग से चाहे भाग लो कोई, मन से भाग न पाये
तोरा मन दर्पण कहलाये – 2

तन की दौलत ढलती छाया मन का धन अनमोल
तन के कारण मन के धन को मत माटि मेइन रौंद
मन की क़दर भुलानेवाला वीराँ जनम गवाये
तोरा मन दर्पण कहलाये – 2

1960s

ज़रा सी और पिला दो भंग - Zara Si Aur Pila Do Bhang (Kajal)

फ़िल्म: काजल / Kaajal (1965)
गायक/गायिका: मोहम्मद रफ़ी, आशा भोंसले
संगीतकार: रवि
गीतकार: साहिर लुधियानवी
अदाकार: धर्मेंद्र, मीना कुमारी, पद्मिनी, राज कुमार

(ज़रा सी और पिला दो भंग 6 more words

1960s

मेरे भैया मेरे चँदा मेरे अनमोल रतन - Mere Bhaiya Mere Chanda (Kajal)

फ़िल्म: काजल / Kaajal (1965)
गायक/गायिका: आशा भोंसले
संगीतकार: रवि
गीतकार: साहिर लुधियानवी
अदाकार: धर्मेंद्र, मीना कुमारी, राज कुमार

(मेरे भैया मेरे चँदा
मेरे अनमोल रतन
तेरे बदले मैं ज़माने की
कोई चीज़ न लूँ) – 2

तेरी साँसों की कसम खाके, हवा चलती है
तेरे चहरे की खलक पाके, बहार आती है
एक पल भी मेरी नज़रों से तू जो ओझल हो
हर तरफ़ मेरी नज़र तुझको पुकार आती है

(मेरे भैया मेरे चँदा
मेरे अनमोल रतन
तेरे बदले मैं ज़माने की
कोई चीज़ न लूँ) – 2

तेरे चहरे की महकती हुई लड़ियों के लिए
अनगिनत फूल उम्मीदों के चुने हैं मैंने
वो भी दिन आएं कि उन ख़्वाबों के ताबीर मिलें
तेरे ख़ातिर जो हसीं ख़्वाब बुने हैं मैंने

(मेरे भैया मेरे चँदा
मेरे अनमोल रतन
तेरे बदले मैं ज़माने की
कोई चीज़ न लूँ) – 2

1960s

कबिरा निर्भय राम जप - Kabira Nirbhay Ram Jap (Kajal)

फ़िल्म: काजल / Kaajal (1965)
गायक/गायिका: मोहम्मद रफ़ी, आशा भोंसले
संगीतकार: रवि
गीतकार: साहिर लुधियानवी
अदाकार: धर्मेंद्र, मीना कुमारी, पद्मिनी, राज कुमार

कबिरा निर्भय राम जप
जब लगदी में बाति
तेल घटा बाती बुझी
सोवेगा दिन-राति

महफ़िल में तेरी यूँ ही रहे
जश-ए-चराग़ाँ
आँखों में ही ये रात
ग़ुज़र जाये तो अच्छा

साच बराबर तप नहीं
झूठ बराबर पाप
जा के हिरदय साच है
ता के हिरदय आप

जा कर तेरी महफ़िल से
कहाँ चैन मिलेगा
अब अपनी जगह अपनी
ख़बर जाये तो अच्छा

जब मैं था तब हरि नहीं
अब हरि है मैं नाहीं
सब अंधियारा मिट गया
जब दीपक देखा माहिं

जिस सुबह की तक़दीर में
लिखी हो जुदाई
उस सुबह से पहले
कोई मर जाये तो अच्छा – 2

1960s