Tags » Sahir Ludhianvi

O bachchon sun lo baat

This article is meant to be posted in atulsongaday.me. If this article appears in sites like lyricstrans.com and ibollywoodsongs.com etc then it is piracy of the copyright content of atulsongaday.me and is a punishable offence under the existing laws. 1,219 more words

Yearwise Breakup Of Songs

O jee aankhon waalon dekho dekho

This article is written by Avinash Scrapwala, a fellow enthusiast of Hindi movie music and a contributor to this blog. This article is meant to be posted in atulsongaday.me. 1,186 more words

Yearwise Breakup Of Songs

Bojh uthhaa le saathhi bojh uthhaa le

This article is meant to be posted in atulsongaday.me. If this article appears in sites like lyricstrans.com and ibollywoodsongs.com etc then it is piracy of the copyright content of atulsongaday.me and is a punishable offence under the existing laws. 1,202 more words

Yearwise Breakup Of Songs

ये ज़ुल्फ़ अगर खुल के बिखर जाए तो अच्छा - Ye Zulf Agar Khuk Ke (Kajal)

फ़िल्म: काजल / Kaajal (1965)
गायक/गायिका: मोहम्मद रफ़ी
संगीतकार: रवि
गीतकार: साहिर लुधियानवी
अदाकार: धर्मेंद्र, मीना कुमारी, पद्मिनी, राज कुमार

ये ज़ुल्फ़ अगर खुल के बिखर जाए तो अच्छा
इस रात की तक़दीर सँवर जाए तो अच्छा
ये ज़ुल्फ़…

जिस तरह से थोड़ी सी तेरे साथ कटी है
बाक़ी भी उसी तरह गुज़र जाए तो अच्छा
ये ज़ुल्फ़…

दुनिया की निगाहों में बुरा क्या है भला क्या
ये बोझ अगर दिल से उतर जाए तो अच्छा
ये ज़ुल्फ़…

वैसे तो तुम्हीं ने मुझे बर्बाद किया है
इल्ज़ाम किसी और पे आ जाए तो अच्छा
ये ज़ुल्फ़…

1960s

समझी थी के ये घर मेरा है - Samjhi Thi Ki Ye Ghar Mera Hai (Kajal)

फ़िल्म: काजल / Kaajal (1965)
गायक/गायिका: आशा भोंसले
संगीतकार: रवि
गीतकार: साहिर लुधियानवी
अदाकार: धर्मेंद्र, मीना कुमारी, पद्मिनी, राज कुमार

समझी थी के ये घर मेरा है
मालूम हुआ मेहमान थी मैं
हो जिन्हें अपना-अपना कहती थी
हो उन सबके लिये अनजान थी मैं

इस तरह न मुझको ठुकराओ
इक बार गले से लग जाओ
हाय मैं अब भी तुम्हारी हूँ लोगों
रूठो न अगर नादान थी मैं

मेरा खोया हुआ बचपन ला दो मुझे
क्या दोष हुआ समझा दो मुझे
वो होंठ भी ना क्यूँ कहते हैं
जिन होंठों की मुस्कान थी मैं

तुम शाद रहो आबाद रहो
अब मैं तुम सबसे दूर चली
हाय परदेस बनी हैं वो गलियाँ
जिन गलियों की पहचान थी मैं

1960s

तोरा मन दर्पण कहलाये - Tora Man Darpan Kehlaaye (Kajal)

फ़िल्म: काजल / Kaajal (1965)
गायक/गायिका: आशा भोंसले
संगीतकार: रवि
गीतकार: साहिर लुधियानवी
अदाकार: धर्मेंद्र, मीना कुमारी, पद्मिनी, राज कुमार

प्राणी अपने प्रभु से पूछे किस विधी पाऊँ तोहे
प्रभु कहे तु मन को पा ले, पा जयेगा मोहे

तोरा मन दर्पण कहलाये – 2
भले बुरे सारे कर्मों को, देखे और दिखाये
तोरा मन दर्पण कहलाये – 2

मन ही देवता, मन ही ईश्वर, मन से बड़ा न कोय
मन उजियारा जब जब फैले, जग उजियारा होय
इस उजले दर्पण पे प्राणी, धूल न जमने पाये
तोरा मन दर्पण कहलाये – 2

सुख की कलियाँ, दुख के कांटे, मन सबका आधार
मन से कोई बात छुपे ना, मन के नैन हज़ार
जग से चाहे भाग लो कोई, मन से भाग न पाये
तोरा मन दर्पण कहलाये – 2

तन की दौलत ढलती छाया मन का धन अनमोल
तन के कारण मन के धन को मत माटि मेइन रौंद
मन की क़दर भुलानेवाला वीराँ जनम गवाये
तोरा मन दर्पण कहलाये – 2

1960s

ज़रा सी और पिला दो भंग - Zara Si Aur Pila Do Bhang (Kajal)

फ़िल्म: काजल / Kaajal (1965)
गायक/गायिका: मोहम्मद रफ़ी, आशा भोंसले
संगीतकार: रवि
गीतकार: साहिर लुधियानवी
अदाकार: धर्मेंद्र, मीना कुमारी, पद्मिनी, राज कुमार

(ज़रा सी और पिला दो भंग 6 more words

1960s