Tags » Salary

How a lesser paying job makes sense to me

This may seem like a strange blog post. Why on earth would a finance blogger even consider a lesser paying job, and let alone be pleased about it? 669 more words

Goals

Vishal Sikka quits as Infosys CEO after months of battling with the old guard

Infosys is losing the captain of its mothership.

Vishal Sikka, the first non-founder managing director & CEO of the Indian software major, resigned today (Aug. 18), some three years after his appointment. 322 more words

Obama/Democrats Problem – Workers Get Paid the Same as 10 Years Ago

While democrats puzzle over why their message does not resonate with regular people, republicans stumbled across a key dissatisfaction factor- people in U.S. get poorer. The average worker’s salary is at the same level it was 10 years ago, while prices on everything else (especially the rent and healthcare) went significantly up. 184 more words

Politics

Emma Stone Is the World's Highest Paid Actress

 EMMA STONE tops the annual “Forbes” list of ‘The Highest Paid Actresses in World.’  She raked in $26 million over the past 12 months.  JENNIFER LAWRENCE was #1 the past two years . 69 more words

Features

IBPS PO 2017 - Know Important dates and Exam Pattern - Apply link

The much awaited IBPS PO Recruitment notification is now out! The IBPS PO Prelims exam 2017 will now take place in October 2017. IBPS Probationary Officer exam is being conducted to recruit candidates for  260 more words

Blog

यह आने वाले तूफान का संकेत

समाचार सार-

अखबार मालिक शांत हैं, लेकिन कर्मचारी प्रताड़ित। यह आने वाले तूफान का संकेत भर है। उधर मजीठिया क्रांतिकारी गुपचुप अपनी तैयारी में लगे हैं। जैसे ही कोई एक कर्मचारी मजीठिया भुगतान हासिल करेगा, समूचे समाचार पत्र जगत में तूफान खड़ा हो जाएगा।

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रतन भूषण की फेसबुक वाल से साभार।

जब से देश के प्रधानमंत्री मोदी जी बने हैं, देशवासियों में उनका नारा अच्छे दिन आएंगे ज्यादा ही चर्चा में है। आये मौकों पर मोदी जी के इस नारे का इस्तेमाल चाहे व्यंग्य के रूप में या फिर अच्छे रूप में हर कोई करता ही है। बुरा हुआ तो सभी बोल पड़ते हैं, लो आ गए अच्छे दिन। जब कुछ अच्छा होता है तो यह भी कहते हैं कि हमने पहले ही कहा है या कहते आ रहे हैं कि अच्छे दिन आएंगे। लेकिन हम मोदी जी के इस नारे का इस्तेमाल अखबार कर्मियों के लिए कर रहे हैं। हो सकता है कि अख़बार कर्मियों को मेरी यह बात मोदी जी की ही बात लगे यानी हवाबाजी नजर आये, पर यह सौ प्रतिशत सही है और मैं फिर से यही बात दोहरा रहा हूँ कि अख़बार कर्मियों के अच्छे दिन आएंगे और यह वक़्त बताएगा, जो बहुत जल्द आने वाला है।

हम यह भी बताते आ रहे हैं कि अख़बार मालिकानों को आजकल यही चिंता सता रही है कि उन्हें कैसे इस मजीठिया की देनदारी से मुक्ति मिले।उनके लोग, वे खुद और उनके वकील इसी काम में दिन रात जुटे रहते हैं कि ऐसा क्या किया जाये कि मजीठिया की देनदारी से बचा जाए। मालिकान माननीय सुप्रीम कोर्ट से 19 जून 2017 को आये फैसले के बाद से ही परेशान हैं और इससे बचने का रास्ता तलाश रहे हैं। हम यह भी बता चुके हैं कि मालिकान अभी कोई ऐसा सबूत वर्कर को नहीं देना चाहते जिससे उनकी कोर्ट में फिर से किरकिरी हो और इस बार कोर्ट में कुछ ऐसा हुआ तो उनका बचना मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन होगा। माननीय कोर्ट यह साफ कह चुका है कि हम मालिकानों को एक मौका दे रहे हैं।यही वजह है कि कुछ अख़बार मालिकों ने अभी तक वर्करों की सालाना तनख्वाह नहीं बढ़ाई है। कुछ ने थोड़ा बहुत दिया है तो वह मजीठिया के हिसाब से नहीं है। कुछ ने सैलरी स्लीप देना बंद कर दिया है तो कुछ ने ऑन लाइन रिसिप्ट देना शुरू किया है। अब आगे देखने वाली बात यह होगी कि अख़बार मालिकान और उनके प्रबंधक और क्या क्या करते हैं मजीठिया की देनदारी से बचने के लिए।

दूसरी ओर अख़बार के वर्कर हैं जो मालिकानों की तमाम बाधाओं को दरकिनार कर और बेकार मान अपने काम में जुटे हैं। जिस तरह मालिकान खुद को बचाने में जुटे हैं, वैसे ही वर्कर मालिकानों को फिर से केस में कैसे फंसाया जाये, इस जुगत में लगे हैं। वर्कर मालिकानों से पैसा लेने में कुछ वक्त लगने की बात से अनजान नहीं हैं, लेकिन उन्हें पूरा यकीन है कि उनका पैसा मालिक देगा जरूर, चाहे हंस के दे,चाहे रो के।तो मोदी जी का नारा देश में सच साबित हो या न हो, पर अख़बार वर्करों के लिए उनका नारा अच्छे दिन आएंगे, जरूर सच होगा। यह बात अब निचली अदालतों में भी दिख रही है और जिन केसों में कोई कानूनी बाधा नहीं है, उनका काम सही तरह से चल रहा है। कुल मिलाकर सभी अख़बार कर्मियों के अच्छे दिन जरूर आएंगे।

Country

Questions to Ask Your Interviewer

So you’re nearing the end of your interview when your interviewer asks, “Do you have any questions for me?” Many applicants are caught off-guard; after all, aren’t you supposed to answer questions rather than ask them? 364 more words

Career Advice