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How Guiding Prepared me for Law School

I applied for law school while I was a Sangam volunteer, completing my personal statement and ordering transcripts between delivering WAGGGS programming, bringing Guiders from around the world to the bustling market and taking in the beauty of Diwali celebrations. 636 more words

The Test Of Patience

Last week, when Zoya Akhtar’s Dil Dhadakne Do released in the theatres to a good 2 hours 50minutes of reel time, I saw the audience go berserk with philosophies of lengthy- time wasting movies. 1,027 more words

My Thoughts On... Some Recent Raj Kapoor Films Viewed

This post is a conglomeration of thoughts I posted on a Bollywood forum on various Raj Kapoor movies I’ve seen in the past couple of months. 2,916 more words

The Films

One Day Trip to Chunchi Falls (Karnataka)

Chunchi falls, an unfamiliar water falls which is located near Kanakapura and hardly 1 and  half hour drive from Bangalore. River Arkavathi which takes birth in Nandi hills flows furiously towards… 356 more words

Chunchi Falls

Faces in Kumbh


Millions of pilgrims from all over the world gather on the banks of rive Ganga-Yamuna after 12 years during Kumbh. Kumbh at Allahabad is believed as the largest congregation on our planet. 62 more words

India

एकजोड़ा...

अकसर देखती हूं,
राहगीर, नाते रिश्तेदार
और यहां तक कि
मेरे अपने दोस्तयार…
उन्हें घूरघूर कर देखते हैं,
उन की एक झलक को लालायित रहते हैं…

आज मैं
उन लालायित आत्माओं को
कहना चाहती हूं,
जिन के लिए वे अकसर मर्यादा भूल जाते हैं,
वह मेरे शरीर का हिस्सा भर हैं…
ठीक वैसे ही, जैसे
मेरे होंठ,
मेरी आंख
और मेरी नाक
या फिर मेरे पांव या हाथ…

इसी के साथ
मैं उन से अनुरोध करती हूं…
मेरे मन में यह संशय न उठने दें
कि मैं नारी हूं या महज स्तनों का एकजोड़ा…

Kavita

आई टी एम कन्वर्जेन्स -२

कन्वर्जेन्स का मौका बड़ा खास है

इस मीटिंग में हम सब बड़े पास हैं

ज्ञान की नदियों का संगम हुआ है

संगम में डुबकी से चित पावन हुआ है

मिलने मिलाने का मौका मिला है

सीखने सिखाने का मौका मिला है

ज्ञान की ये लौ अब बढ़ती रहेगी

चमक इस लौ की छात्रों तक पहुंचेगी/

रेडिसन की शोखी थी ऐसी चोखी

की रुमानियत का समां बन गया

शोखी ने हम सबको ऐसा भिगोया

की बचपन के दिन फिर जवां हो गए

न रहा कोई बंधन, न रहा कोई दूरी

मुक्त बालपन की रवानी जवां हो गयी

बहुत खेल खेले, मज़ा आ गया

मज़ों के मौज़ों का कुछ ऐसा मज़मा बना

की हर चेहरा खिला और हर दिल खिला

ग से गणेश का वो फ़िल्मी गीत गाना

स से सरिता का वो ठुमका लगाना

ल से लक्ष्मी का बेजोड़ ठहाके लगाना

हमसबों का पुरजोर कहकहे लगाना

हम सब का रैंप पै स्टाइल दिखा के चलना

मिस्टर मिस आई टी एम का चयन होना

बीच के खेलों की तो रवानी अलग थी

हम सबके दिलों की जवानी अलग थी

न कोई रोके हमें, न कोई टोके हमें

खुशनुमा ये सफर हद ले चला है

कुछ ऐसी हदें, जो भुलाये न भूलें

हम सब को सदा जो जुड़ाए चलें /

चन्दन अधिकारी

अप्रैल ३०, २०१५

Poem