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Gavaskar, Manjrekar, Tendulkar : Bombay School of Batting

I remember watching the 2003 World Cup final. The post match presentation had a sad Tendulkar collecting the golden bat from Sir Sobers. A player who made that world cup his own, was found struggling to smile after being named the best player of the tournament. 817 more words

Rohit Sharma

Who said, 'Iski phati padi hai, Jassi, wahi jagah be ball daal', when the score was 82/4?

More often than not, the stump mike provides greater insight of the tension in an ongoing cricket match, especially when the oratorical genius of Sunil Gavaskar… 264 more words

Churumuri

Sanjay Manjrekar: Tipping

“The strong tipping culture in America can be unsettling for outsiders, but you see the sense of it after a while. It really is a ‘performance incentive scheme’ for their staff. 22 more words

Sports

दिप्ती को अंग्रेज़ी न आना शर्म की बात नहीं, लेकिन मांजरेकर का हिन्दी न बोलना देश का अपमान है !

किसी भी देश के विकास में महिलाओं का बहुत बड़ा किरदार होता है, ऐसा कहा जाता है कि पुरुष के कंधों से कंधा मिलाकर अगर महिलाएं भी चलने लगें तो देश का विकास तय है। भारत में भी महिलाओं और पुरुष के बीच की ये दूरी मिटती जा रही है, फिर चाहे वह राजनीति का अखाड़ा हो या फिर खेल का मैदान।
ओलंपिक्स में तो भारतीय तिरंगे की शान महिलाएं ही रहीं, जब पीवी सिंधू और साक्षी मलिक ने भारत की झोली में 2 पदक दिलाए थे। देश में धर्म की तरह रुत्बा रखने वाले क्रिकेट में भी भारतीय महिलाएं देश की शान बनी हुई हैं। हाल ही में चैंपियंस ट्रॉफ़ी के फ़ाइनल तक पहुंचने वाली भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम की तरह महिला क्रिकेट टीम भी वर्ल्डकप में चमक बिखेर रही है।

इंग्लैंड में खेले जा रहे विश्वकप में मिताली राज की कप्तानी वाली टीम इंडिया सेमीफ़ाइनल में पहुंचने वाली पहली टीम बन गई है। 4 मैचों में 4 जीत के साथ भारतीय महिला टीम क्रिकेट पर राज करने के बेहद क़रीब खड़ी है। और इसका श्रेय जाता है टीम इंडिया की कैप्टन मिताली राज को, अपने नाम की ही तरह वह भी क्रिकेट पर मानो ‘राज’ कर रही हैं।

वनडे क्रिकेट में 181 मैचों में 51.81 की बेमिसाल औसत से 5959 रन बनाने वाली मिताली महिला क्रिकेट में 6000 रन बनाने वाली पहली क्रिकेटर बनने से कुछ ही दूर हैं। उनके आगे बस इंग्लैंड की पूर्व कप्तान शार्लोट एडवर्ड्स ही हैं जिनके नाम 191 मैचों में 5992 रन है। यानी 41 रन बनाने के साथ ही मिताली महिला क्रिकेट में 6 हज़ार रन बनाने वाली पहली खिलाड़ी बन जाएंगी।

मिताली के लिए ये किसी सपने से कम नहीं होगा, लेकिन उससे भी बढ़कर ये है कि जिस देश में क्रिकेट को धर्म और सचिन तेंदुलकर को भगवान माना जाता है उस देश में मिताली का एक अलग मुक़ाम हो गया है। पहले किसी महिला खिलाड़ी के बारे में कहा जाता था, ‘’क्या खेलती है महिला क्रिकेट की सचिन है।‘’ ‘’उसे देखो महिला क्रिकेट की कपिल देव है।‘’ लेकिन उस सोच को बदलते हुए मिताली ने अब कुछ ऐसा कर दिया है, ‘’मेरी बेटी तो अगली मिताली बनेगी’’।

2013 में जब अपने ही घर में टीम इंडिया को वर्ल्डकप में हार मिली थी तो मिताली के साथ साथ पूरा देश निराश और हताश था, लेकिन उस हार से न सिर्फ़ मिताली ने सबक़ लिया बल्कि क्रिकेट पर राज करने की रणनीति बनाने लगीं और उसका रंग अब इंग्लैंड में उफ़ान पर है। मिताली एक शानदार सेनापति की तरह टीम का नेतृत्व कर रही हैं तो उनकी साथी खिलाड़ी भी एक लक्ष्य के साथ भारत को वर्ल्ड चैंपियन बनाने की ओर तेज़ी से ले जा रही हैं।

एकता बिश्ट से लेकर अनुभवी झूलन गोस्वामी और श्रीलंका के ख़िलाफ़ शानदार ऑलराउंड प्रदर्शन (78 रन और 1 विकेट) करने वाली दिप्ती शर्मा ने टीम इंडिया को महत्वपूर्ण जीत के साथ सेमीफ़ाइनल का टिकट हासिल करा दिया। दिप्ती के इस प्रदर्शन से सारा हिन्दुस्तान झूम रहा था, उन्हें जब मैन ऑफ़ द मैच की ट्रॉफ़ी मिली तो भारतीय क्रिकेट फ़ैन्स के मुंह से बस एक ही बात निकली कि ‘’दिप्ती इसकी असली हक़दार हैं’’।

लेकिन फिर जो हुआ उसने दिप्ती के साथ साथ सारे हिन्दुस्तान को शर्मसार कर दिया, और ये किसी और ने नहीं बल्कि भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम के पूर्व बल्लेबाज़ और वर्तमान कॉमेंटेटर संजय मांजरेकर ने किया। दरअसल, पोस्ट मैच प्रेज़ेंटेशन में जब दिप्ती आईं तो मांजरेकर ने उनसे अंग्रेज़ी में सवाल किया। दिप्ती अंग्रेज़ी में असहज दिखीं लिहाज़ा उन्होंने अपनी मातृ भाषा और हिन्दुस्तान की अपनी भाषा हिन्दी में जवाब दिया। सभी को लगा कि हिन्दुस्तान के बड़े और ख़ूबसूरत शहर मुंबई मे जन्में मांजरेकर भी अब हिन्दी में ही अगला सवाल करेंगे। लेकिन शायद मांजरेकर को टीवी के सामने और इंग्लैंड में अंग्रेज़ों की मौजूदगी में हिन्दी बोलने में शर्म महसूस हो रही थी। वह हिन्दुस्तानी ‘’अंग्रेज़’’ की तरह फ़र्राटे से इंग्लिश में सवालों का बाउंसर दिप्ती पर दाग रहे थे जिसे वहां मौजूद ट्रांसलेटर हिन्दी में दिप्ती को समझा रही थी।

भारत की जीत की ख़ुशी और दिप्ती के ख़ुश करने वाले प्रदर्शन से अचानक हिन्दुस्तानियों का ध्यान मांजरेकर के द्वारा दिप्ती की बेइज़्ज़ती और देश को शर्मसार करने पर चला गया। सवाल ये नहीं कि दिप्ती को अंग्रेज़ी नहीं आती, बल्कि सवाल ये है कि क्या हिन्दुस्तान के लिए खेलने वाले और हिन्दुस्तान में जन्में और हिन्दी गाना गाने का शौक़ रखने वाले मांजरेकर की ज़ुबान से अंग्रेज़ों की ज़मीन पर हिन्दी क्यों ग़ायब हो गई ? क्या मांजरेकर को पाकिस्तानी पुरुष क्रिकेट टीम के कप्तान सरफ़राज़ अहमद का वह वाक़्या याद आ गया था जिसमें उनके इंग्लिश अच्छी न बोलने की वजह से ख़ूब खिंचाई हुई थी ?

जवाब चाहे जो भी हो, लेकिन मांजरेकर अगर हिन्दी में दिप्ती से बात कर लेते तो उनका सिर शर्म से झुकता नहीं बल्कि हिन्दी और हम हिन्दुस्तानियों का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता। अब बस फ़र्क इतना है कि इंग्लिश न आते हुए भी अपने दिल और देश की भाषा बोलने वाली दिप्ती को सारे देश ने दिल में जगह दी है तो हिन्दुस्तान के लिए 37 टेस्ट और 74 वनडे खेलने वाले मांजरेकर अचानक हिन्दी से प्यार करने वालों के दिल से उतर गए।

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