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Try to save the girl child

ఆ మృగాల నుంచి చిన్నారులను కాపాడుకుందాం…

మన ఆడపిల్లలకు ప్రతికూల పరిస్థితులు ఎదురవకుండా ఉండాలంటే వారికి చిన్న వయసు నుంచే కొన్ని విషయాలపై అవగాహన కలిగించడం అత్యవసరం…continue

Vasundhara Kutumbam

QUOTES FOREVER

EVERY GIRL IS A PRINCESS.

SHE DESERVES THAT HAPPINESS.

EVERY GIRL DESERVES

EQUAL RIGHT TO ENJOY

LIFE AS THEY WISH

JUST LIKE A BOY.

SAVE THAT SMILE. 11 more words

Life

బాలికలపైనే భారమంతా..!

ప్రస్తుతం బాలికలపై లైంగిక హింసే కాదు.. ఇంటి పనుల భారం కూడా అధికంగానే పడుతోందని యునిసెఫ్ తాజా నివేదిక వెల్లడించింది. ఈ నేపథ్యంలో దక్షిణాసియాలో..continue

Vasundhara Kutumbam

October 11 : International Day of the Girl 2016

చిట్టితల్లి కష్టాలు తీరేదెన్నడో..

చిట్టితల్లి కష్టాలు తీరేదెన్నడో..ముక్కుపచ్చలారని వయసులో పెళ్లి పీటలెక్కిన ఓ చిన్నారి..ఆటపాటలతో కాలం గడపాల్సిన వయసులో వ్యభిచార రొంపిలో కూరుకున్న మరో పసిమొగ్గ..కట్టుబాట్ల పేరుతో నాలుగ్గోడల మధ్యలో బందీ అయిన ఇంకో పుత్తడిబొమ్మ..continue

Vasundhara Kutumbam

एक बाप की ज़ीनत-उसकी बेटी

बेटी खुदा की वो अज़ीम नेमत है के जिसकी अज़मत को  अल्फ़ाज़ मे समेटा नहीं जा सकता। हाँ, अगर बेटी की ज़िंदगी को तीन हिस्सों मे बाट दिया जाए तो शायद उसकी अजमत को समझना थोड़ा असानं हो जाएगा।   अपने बाप के आँगन मे शोर मचाने वाली, अपने वालिदैन की नज़रों का सुकून, उनकी ज़ीनत एक बेटी होती है, फिर ज़िंदगी के दूसरे हिस्से मे अपने शौहर का साथ निबाने वाली, उसकी हमसफ़र ओ हमराज़ वो बेटी अब एक ज़ौजा होती है, और जब जन्नत खुद उस बेटी के कदमों को ढूंढ कर उसमे सिमट आती है तो एक बेटी माँ कहलाती है। वो बेटी ही नस्लों को आगे बढ़ाती है, उन नस्लों को सवारती है और वो मुआशरे को तरक़्क़ी याफ़्ता बनाती है। इसी लिए कई जगह पर और कई साहेब ए अक्ल ये कहते नजर आ जाते है की एक बेटी के पढ़ने लिखने से सिर्फ वो खुद ही नहीं पढ़ती बल्कि एक पूरा खानदान और कई नसले पढ़ जाती है।


बच्चे हर घर की रौनक होते है चाहे वो बेटे हो या फिर बेटी, लेकिन खुसूसन बेटिया ज्यादा मोहब्बती होती है और अकसर देखा गया है की बेटिया बाप से ज्यादा करीब होती है। बाप के दिल की ठंडक, उसके दिल का चैन होती है,  एक बेटी इस दुनिया मे खुदा की रहमत बन कर आती है और अपने वालिदैन के दिलों को सुकून और इत्मीनान से भर देती है।  पहली बार एक बाप अपनी बेटी को गोद मे लेने के लिए मुसलसल तड़पता है और जैसे ही वो अपनी नन्ही सी जान को अपनी गोद मे लेता है तो अपनी आँसू भारी आँखों से अपनी ज़ौजा की तरफ यूँ देखता है के जैसे वो उसका शुक्रिया अदा कर रहा हो, इसी बीच अपने हाथों से उस नन्ही बच्ची के हाथों को यू छू रहा होता है के मानों वो खुद को यकीन दिल रहा हो के वो जन्नत मे नहीं बल्कि इसी दुनिया मे एक पारी अपने हाथों मे उठाए हुए है, उधर वो बच्ची भी अपने प्यार को जताने के लिए अपने बाप की उँगली को  अपने नन्हे हाथों से ऐसे पकड़ लेती है के जैसे वो जवाब मे अपने बाप से कह रही हो के “बाबा, मैं ही आपकी वो नन्ही परी हूँ के जिसका रास्ता आप देखते थे, के जिसके लिए आप और माँ दुआ किया करते थे”। जी हाँ, यही बेटी जब अपने बाप के घर आने पर अपने नन्हें-नन्हें कदमों से दौड़ कर दरवाजा खोलती है और अपने हाथों को अपने बाप की तरफ उठा कर गोद मे लेने की सिफ़ारिश करती है तो उस बाप की सारी थकान मिट जाती है, थक के लौटने के बावजूद भी वो बाप अपनी बेटी के साथ खेलने मे इतना मसरूफ़ हो जाता है के वक़्त कब गुज़र गया ये उसे पता ही नहीं चलता, ऐसा लगता है के वक़्त थम सा गया हो।रोज ये बच्ची नई नई शरारतें कर के अपने वालिदैन के दिल को लुभाती रहती है, जैसे कभी अपने बाप को घोड़ा बना कर उस पर सवारी करती है तो कभी अपने ही अंदाज में कुछ बातें करती है और अपने घर को अपनी हँसी से महका देती है, लेकिन ये वक़्त कभी किसी का नहीं हुआ है और ना ही कभी होगा। देखते ही देखते एक बेटी बड़ी हो जाती है और अपने बाप की ज़ीनत अब किसी और की इज़्ज़त बन कर अपने बाप के घर से रुखसत हो जाती है लेकिन इससे बाप-बेटी का रिश्ता हरगिज़ खत्म नहीं होता है बल्कि इस रिश्ते मे और मजबूती आ जाती है। जब वो बेटी माँ बनती है तो अल्लाह उस माँ के कदमों मे जन्नत को डाल देता है, माँ बनने के बाद वो बेटी अपने बाप की अजमत को और अच्छी तरह समझने लगती है और ये रिश्ता और गहरा होने लगता है।
लेकिन अफसोस, आज हमारे समाज के कई अफराद लड़की का होना अच्छा नहीं समझते है, वो बेटीओं को बोझ समझते है, वजह बहुत ही अहमकाना और बेतुकी है। वो डरते है की बेटी जब बड़ी हो जाएगी तो उसे दहेज देना पड़ेगा, बेटी होने से हमारा खानदान आगे नहीं बढ़ेगा, या बेटियाँ हमारी ज़िम्मेदारियाँ बढ़ा देंगी,ऐसी बहुत सारी वजहें है कि जिनकी वजह से आज बेटी को पैदा ही नहीं होने दिया जा रहा है,उन्हे माँ की कोख में ही मार दिया जा रहा है। लेकिन ये लोग जब बेटों की शादी करने का इरादा रखते है तो एक अच्छी लड़की ढूंढते है, अपनी बहू-बेटी का इलाज करने के लिए एक लेडी डॉक्टर तलाशते है। ज़ाहिरन ये लोग मक्कार है और जालिम भी है, क्यूकि ये लोग दुनिया के साथ साथ खुद से भी झूठ बोल रहे है और अपने नफ़स पर ज़ुल्म कर रहे है, ये लोग शायद भूल गए है कि दहेज उस बेटी ने नहीं माँगा बल्कि खुद उन जैसे कुछ लोगों ने दहेज के इस रिवाज को आम किया है, लड़किओं की पढ़ाई, दुनिया से कदम मिलना, अपने हक के लिए बोलना गलत नहीं बल्कि हमने जो रिवाज इस समाज मे आम किया था वो ही आज हमें परेशान कर रहा है।
आज हमें अपनी बेटियों की इज्जत करनी होगी, उन्हें सही परवरिश देनी होगी,और एक अच्छा इंसान बनाना होगा तभी हम एक बेहतर कल का ख्वाब अपनी आँखों मे सज़ा सकते है।
आखिर मे मैं सिर्फ इतना कहना चाहूंगा की जो बाप अपने घर, खानदान, समाज या अपने ऑफिस की ज़ीनत है, उस बाप की बेटी उसकी ज़ीनत है।
-बाप की ज़ीनत (ज़ैनब) की पहली साल-गिरह पर उनके बाप की तरफ़ से उनको एक छोटा सा तोहफा।

Ali Mahdi Naqvi

What Uttar Pradesh wants in 2017, it's not Spirituality let me remind you!

  1. I don’t want to comment on Akhilesh Yadav ji’s governance in U.P. but I personally think that we the people, need someone from more disciplined regime which Samajwadi Party fails to meet as a criteria because of Ctrl+H.
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