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Freedom Fighter Shaheed Bhagat Singh - The Greatest Indian

Bhagat Singh was born on 27th September 1907 in Village Banga, Punjab. His father was Kishan Singh. When he was born, his father Kishan Singh and his uncles named Ajit and Swaran Singh were jailed for demonstrations against the British Colonisation Bill implemented in 1906. 307 more words

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उधम सिंह के वंसज आज भी मजदूरी करते है

उम्मीद है आज भी जीत सिंह को बुलाया गया होगा, आखिर उसके दादा की बरषी जो है आज,
और अब तक तो वो अपने दिहाड़ी मजदूरी के लिए वापस भी निकल लिया होगा।
Rowlatt Act, जिसमे नागरिको के मूल अधिकारों को छीन लिया जाता है, के खिलाफ 1919 , अप्रैल 13,अमृतसर, जलियावाला बाघ में एक सभा हुई थी जिसमे 10-11 साल का एक बच्चा भी था।
जनरल डायर ने उस सभा में अन्धाधुन्ध गोलिया चलवाई और और हजारो लोगो की जान चली गई।
इस के एवज में ब्रिटिश सरकार ने डायर को प्रमोट कर के लन्दन भेज दिया था।
ये बच्चा अनाथ हो चला था, इसने डायर से बदला लेने की ठानी और 21 साल दिन रात मजदूरी कर के इसने लन्दन जाने का पैसा इकठ्ठा किया।
और आखिर 13 मार्च 1940 को इसने अपना बदला ले लिया।
सबको पता है शहीद उधम सिंह, ये बच्चा था।

पर आज इनके वंशज किस तरह मजदूरी कर के जी रहे है, ये किसी को नही पता, इनका पोते जीत सिंह और परपोते के पास आज दिहाड़ी मजदूरी के अलावा कोई रास्ता नही।
सरकारों ने उन्हें सहायता का वादा तो बहुत किया पर निभा न सकी।
अब ऐसे में किस मुह से देश श्रधांजलि दे, इस महान शहीद को।
ये कहानी अकेले उधम सिंह के परिवार की नही है।

चंद्रशेखर आज़ाद की माँ, आज़ादी के बाद एक वृधाश्रम में रहती थी और लकडिया बीन कर अपना जीवन चलाती थी, उनके मित्र सदाशिव को जब पता चला तो।
वो उन्हें अपने साथ झाँसी ले गए, 1951 में जब उनकी मृत्यू हुई तो झाँसी के लोगो ने उनकी एक मूर्ति लगाने की सोची।
जगह भी तय हो गई, मूर्ति भी तैयार थी पर सरकार को जैसे ही ये पता चला, तो इसका विरोध करते हुए, सरकार ने इस पर सदाशिव को देखते ही गोली मारते का आदेश देते हुए, उस मूर्ति को लगाने जाने वाली भीड़ पर लाठी चार्ज कर दिया।
सरकार किसकी थी ये बताने की जरुरत नही।
और अंत तक जिस शख्स ने पूरा देश आज़ाद कराने के लिए जान दी थी उसकी माँ को हम 2 फीट ज़मीन न दे सके।

ये तो वंसज थे, पर खुद बटुकेश्वर दत्त के साथ क्या हुआ था।
मात्र आज़ादी की 17 साल बाद, गरीबी में अपने जीवन काट रहे दत्त, जब पटना में एक बस परमिट लेने गए थे, तो वहां बैठे अफसर ने ये पूछ लिया था की वो क्रन्तिकारी है उसका कोई सबूत लाओ,
और अपने अंतिम दिनों में जब उन्हें कैंसर हो गया था और 1964 में उन्हें आनन् फानन में AIIMS लाया गया था, तो 3 दिन तक तो बेड भी नही दिया गया था।

ये सिर्फ 3 है, और ऐसे 22 शहीदों की सूचि है सरकार के पास जिनके वन्सज आज गरीबी में जी रहे है।

किस मुह से दे इन शहीदों को श्रधान्जली, समझ नही आता।

India

ਸ਼ਹੀਦ

ਸ਼ਹੀਦ ਮਰਦੇ ਨੀ

ਹਲ਼ ਬਣ ਜਾਂਦੇ ਨੇ

ਵਾਹੁੰਦੇ ਰਹਿੰਦੇ ਨੇ

ਲੋਕਾਂ ਦੇ ਜ਼ਿਹਨ ਦੀ ਸੁਕੀ ਮਿਟੀ ਨੂਂੰ

ਜ਼ਿਆਦਾ ਨੀ ਤਾਂ ਸਾਲ ਚ ਇੱਕ ਵਾਰ

ਸ਼ਹੀਦ ਮਰਦੇ ਨੀ

ਬੀ ਬਣ ਜਾਂਦੇ ਨੇ

ਮੋਟੇ ਤੌਰ ਤੇ ਠੀਕ ਠਾਕ ਚਲਦੀ ਜਿੰਦਗੀ

ਵਿਚ ਇਨਕਲਾਬ ਦੇ ਬੀ ਨਹੀਂ ਉੱਗਦੇ

ਡਾਢੀ ਸੱਟ ਦਾ ਮੀਂਹ ਪੈਂਦਾ ਏ

ਤਾਂ ਇਨਕਲਾਬ ਦੇ ਬੀ ਪੁੰਗਰਨ ਲਗਦੇ ਨੇ

ਐਸੇ ਵਕਤ ਤੇ ਸ਼ਹੀਦਾਂ ਦੇ ਦਿਹਾੜੇ

ਸੁਤੀ ਸੋਚ ਦੀ ਗੋਡੀ ਕਰ ਕੇ

ਉਸ ਨੂਂੰ ਕਿਸੇ ਉਦੇਸ਼ ਲਈ ਮਰ ਮਿਟਣ

ਦੇ ਪਾਣੀ ਨਾਲ ਸਿੰਜਦੇ ਨੇ ©

Story of Basel Al-A'raj, a pharmacist who fought against IDF for 2 hours before shaheed

Basel Al-A’raj, a 31-year-old Palestinian from Bethlehem, a pharmacist, intellect, and struggler was enrolled in March in the list of heroes executed by Israeli occupation forces on the path of liberating Palestine. 1,078 more words

Muslim

Islamic Blueprint - Jihad & The Call to Islam

“Jihad means to war against non-Muslims, and is etymologically derived from the word mujahada signifying warfare to establish the religion.”[1]

As described in Islamic sacred law, Reliance of the traveller… 2,221 more words

Islam

 Fuqaha- who next? 

Mazin Fuqaha, the ex-prisoner from AlQassam being assassinated (4 shots in his head) in the middle of Gaza city by “unknown” using silenced weapon is a very dangerous escalation! 16 more words

Paths