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Carnival of Blogs on Golden Era of Hindi Film Music - April, 2016

Welcome to April, 2016 edition of Carnival of Blogs on Golden Era of Hindi Film Music.

We will commence our present episode with My Favorites: Songs of Spring… 1,643 more words

Blog Carnival

तेरे हुस्न की क्या तारीफ़ करूँ - Tere Husn Ki Kya Tareef Karun (Leader)

फ़िल्म: लीडर / Leader (1964)
गायक/गायिका: मोहम्मद रफ़ी, लता मंगेशकर
संगीतकार: नौशाद
गीतकार: शकील बदांयुनी
अदाकार: दिलीप कुमार, वैजयन्तीमाला

तेरे हुस्न की क्या तारीफ़ करूँ
तेरे हुस्न की
तेरे हुस्न की क्या तारीफ़ करूँ
कुछ कहते हुए भी डरता हूँ
कहीं भूल से तू ना समझ बैठे
की मैं तुझसे मोहब्बत करता हूँ

मेरे दिल में कसक सी होती है, मेरे दिल में
मेरे दिल में कसक सी होती है
तेरे राह से जब मैं गुज़रती हूँ
इस बात से ये ना समझ लेना
की मैं तुझसे मोहब्बत करती हूँ

(तेरी बात मे गीतों की सरगम
तेरी चाल मे पायल की छम छम) – 2
कोई देख ले तुझको एक नजर – 2
मर जाएं तेरी आँखों कसम
मैं भी हूँ अजब इक दीवाना
मरता हूँ ना आहें भरता हूँ
कहीं भूल से तू ना समझ बैठे
की मैं तुझसे मोहब्बत करता हूँ

(मेरे सामने जब तू आता है
जी धक से मेरा हो जाता है) – 2
लेती है तमन्ना अंगड़ायी – 2
दिल जाने कहाँ खो जाता है
महसूस ये होता है मुझको
जैसे मैं तेरा दम भरती हूँ
इस बात से ये ना समझ लेना
की मैं तुझसे मोहब्बत करती हूँ

तेरे हुस्न की क्या तारीफ़ करूं
कुछ कहते हुए भी डरता हूँ
कहीं भूल से तू ना समझ बैठे
की मैं तुझसे मोहब्बत करता हूँ

Lata Mangeshkar

मुझे दुनिया वालों, शराबी न समझो - Mujhe Duniyawalon Sharabi Na Samjho (Leader)

फ़िल्म: लीडर / Leader (1964)
गायक/गायिका: मोहम्मद रफ़ी
संगीतकार: नौशाद
गीतकार: शकील बदांयुनी
अदाकार: दिलीप कुमार, वैजयन्तीमाला

(मुझे दुनिया वालों, शराबी न समझो
मैं पीता नहीं हूँ, पिलायी गयी है) – 2
जहाँ बेखुदी में कदम लड़खड़ाये
वही राह मुझको दिखायी गयी है
मुझे दुनिया वालों शराबी न समझो
मैं पीता नहीं हूँ पिलायी गयी है

नशे मे हूँ लेकिन मुझे ये खबर है
के इस ज़िन्दगी में सभी पी रहें है
किसी को मिले हैं छलकते पियाले
किसीको नज़र से पिलायी गयी है
मुझे दुनिया वालों…

ज़माने के यारों, चलन हैं निराले
यहाँ तन हैं उजले, मगर दिल हैं काले
ये दुनिया है दुनिया यहन मार डर के
दिलों की खराबी छुपायी गयी है
मुझे दुनिया वालों…

1960s

हमीं से मुहब्बत हमीं से लड़ाई - Hamin Se Mohabbat Hamin Se Ladai (Leader)

फ़िल्म: लीडर / Leader (1964)
गायक/गायिका: मोहम्मद रफ़ी
संगीतकार: नौशाद
गीतकार: शकील बदांयुनी
अदाकार: दिलीप कुमार, वैजयन्तीमाला

हमीं से मुहब्बत हमीं से लड़ाई
अरे मार डाला दुहाई दुहाई
अभी नासमझ हो उठाओ न ख़ंजर – 2
कहीं मुड़ न जाये तुम्हारी कलाई

सितम आज मुझ पर जो तुम ढा रही हो हो
बड़ी ख़्हूबसूरत नज़र आ रही हो
ये जी चाहता है के ख़ुद जान दे दूँ – 2
मुहब्बत में आये न तुम पर बुराई

हमें हुस्न की हर अदा है गवारा
हसीनों का ग़ुस्सा भी लगता है प्यारा
उधर तुमने तीर-ए-नज़र दिल पे मारा – 2
इधर हमने भी जान पर चोट खाई

करो ख़ून तुम यूँ न मेरे जिगर का
बस इक वार काफ़ी है तिर्छी नज़र का
यही प्यार को आज़माने के दिन हैं – 2
किये जाओ हम से यूँ ही बेवफ़ाई

1960s

एक शहन्शाह ने बनवा के हसीं ताजमहल - Ek Shehanshah Ne Banwa Ke (Leader)

फ़िल्म: लीडर / Leader (1964)
गायक/गायिका: मोहम्मद रफ़ी, लता मंगेशकर
संगीतकार: नौशाद
गीतकार: शकील बदांयुनी
अदाकार: दिलीप कुमार, वैजयन्तीमाला

एक शहन्शाह ने बनवा के हसीं ताजमहल
सारी दुनिया को मुहब्बत की निशानी दी है
इसके साये मे सदा प्यार के चर्चे होंगे
खत्म जो हो ना सकेगी वो कहानी दी है
एक शहन्शाह ने बनवाके…

ताज वो शम्मा है उल्फ़त के सनम खाने की
जिसके परवानो मे मुफ़लिस भी ज़रदार भी है
संग-ए-मरमर मे समाए हुए ख्वाबों की क़सम
मरहले प्यार के आसान भी दुश्वार भी हैं
दिल को एक जोश इरादों को जवानी दी है
एक शहन्शाह ने बनवाके…

ताज इक ज़िन्दा तसव्वुर है किसी शायर का
इसक अफ़साना हकीकत के सिवा कुछ भी नही
इसके आगोश मे आकर ये गुमां होता है
ज़िन्दगी जैसे मुहब्बत के सिवा कुछ भी नही
ताज ने प्यार की मौजों को रवानी दी है
एक शहन्शाह ने बनवाके…

ये हसीं रात ये महकी हुई पुरनूर फ़ज़ा
हो इजाज़त तो ये दिल इश्क़ का इज़हार करे
इश्क़ इन्सान को इन्सान बना देता है
किसकी हिम्मत है मुहब्बत से जो इनकार करे
आज तकदीर ने ये रात सुहानी दी है
एक शहन्शाह ने बनवाके…

Lata Mangeshkar

दईया रे दईया लाज मोहे लागे - Daiya Re daiya Laaj Mohe Lage (Leader)

फ़िल्म: लीडर / Leader (1964)
गायक/गायिका: आशा भोंसले
संगीतकार: नौशाद
गीतकार: शकील बदांयुनी
अदाकार: दिलीप कुमार, वैजयन्तीमाला

दीवाली आई घर-घर दीप जले

दईया रे दईया लाज मोहे लागे – 2
पायल मोरी बाजे सास मोरी जागे
दईया रे दईया…

आऊँ मैं कैसे डगर तोरी मितवा
छुप-छुप देखे हैं घर के लोगवा
पग ठहरे तो मन मोरा भागे – 2
दईया रे दईया…

चूड़ियाँ खनकें तो डर-डर जाऊँ
झाँझर झनके तो मर-मर जाऊँ
बँधे पग में शरम के धागे – 2
दईया रे दईया…

ननदी रोके देवर मोरा टोके
चलें ना बहाने चलें ना कोई धोखे
बड़ी मुश्क़िल है आज मोरे आगे – 2
दईया रे दईया…

1960s

अपनी आज़ादी को हम हरगिज़ मिटा सकते नहीं - Apni Azadi Ko Hum Hargiz (Leader)

फ़िल्म: लीडर / Leader (1964)
गायक/गायिका: मोहम्मद रफ़ी
संगीतकार: नौशाद
गीतकार: शकील बदांयुनी
अदाकार: दिलीप कुमार

अपनी आज़ादी को हम हरगिज़ मिटा सकते नहीं
सर कटा सकते हैं लेकिन सर झुका सकते नहीं

हमने सदियों में ये आज़ादी की नेमत पाई है
सैकड़ों क़ुरबानियाँ देकर ये दौलत पाई है
मुस्कराकर खाई हैं सीनों पे अपने गोलियाँ
कितने वीरानों से गुज़रे हैं तो जन्नत पाई है
ख़ाक में हम अपनी इज़्ज़त को मिला सकते नहीं

क्या चलेगी ज़ुल्म की अहले वफ़ा के सामने
जा नहीं सकता कोई शोला हवा के सामने
लाख फ़ौजें ले के आई अमन का दुश्मन कोई
रुक नहीं सकता हमारी एकता के सामने
हम वो पत्थर हैं जिसे दुश्मन हिला सकते नहीं

वक़्त की आज़ादी के हम साथ चलते जाएंगे
हर क़दम पर ज़िंदगी का रुख़ बदलते जाएंगे
गर वतन में भी मिलेगा कोई गद्दार-ए-वतन
अपनी ताक़त से हम उसका सर कुचलते जाएंगे
एक धोखा खा चुके हैं और खा सकते नहीं

1960s