Tags » Simon Commission

Can India and Burma indeed change Nagas into Indians and Burmans?

Kaka D. Iralu
God the creator of all the nations on earth, thundered through his Prophet Jeremiah saying:
“Can the Ethiopian change his skin or the Leopard his spots? 713 more words

Naga Nationalism

वीर-बलिदानी लालाजी

लाल-बाल-पाल के लाल-लाजपत राय का स्मरण कर रहे कौशल किशोर

आज से ठीक 87 साल पहले इसी दिन (30 अक्टूबर) को लाहौर में साइमन कमीशन का विरोध करने निकले लाला लाजपत राय के सीने पर लाठियां भांजी गई थीं। तब देश में अंग्रेजों का राज था। 1928 में साइमन कमीशन के विरुद्ध उनका ऐतिहासिक प्रदर्शन उनकी बहादुरी की सच्ची मिसाल है। उनके लिए 63 वर्ष की अवस्था में स्कॉट और सांडर्स का हमला प्राणघातक साबित हुआ। आखिरकार 17 नवंबर को लालाजी ने देह त्याग दी। इस बीच उन्होंने भी ठीक 18 दिनों का एक महाभारत ही लड़ा है। उनके निधन को एनी बेसेंट ने एक महानायक की शहादत करार देते हुए कहा था कि बेहद मुश्किल होता है एक जन आंदोलन का नेतृत्व करते हुए सबसे आगे रहकर आक्रमण को ङोलना। उस दौर में दूसरी भारी-भरकम आवाज देशबंधु चितरंजन दास की विधवा बसंती देवी की उभरी थी। इसी ललकार का नतीजा था कि चंद्रशेखर आजाद की हंिदूुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन आर्मी के नायक भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु ने मिलकर सांडर्स वध की योजना रची और फांसी पर झूलना कबूल किया। यह सब आजादी की लड़ाई का क्रांतिकारी घटनाक्रम है। यह उचित ही है कि मोदी सरकार लाजपत राय के जन्म का 150 साल पूरा होने पर उनके सम्मान में 5,10 और 150 रुपये के विशेष सिक्के ढालने जा रही है। देश के इस लाल को सम्मानपूर्वक शेरे पंजाब और पंजाब केसरी भी कहा जाता है। लालाजी के जीवनकाल का विस्तार 19वीं सदी के अंतिम तीन दशकों और 20वीं सदी के पहले तीन दशकों के बीच है। इस दौर की भारतीय राजनीति में लालाजी जैसा कोई दूसरा सितारा खोजना आसान नहीं। यह उनकी विलक्षणता का प्रभाव था कि लाल-बाल-पाल के युग में विपरीत ध्रुव भी आकर्षित होते रहे। स्वतंत्रता संग्राम में उनका योगदान सचमुच अद्वितीय है। 19वीं सदी में लालाजी ने अंग्रेजी और हंिदूुस्तानी के माध्यम से शिक्षा की पैरवी की। भारतीय भाषाओं में शिक्षा देने को उचित ठहराकर लालाजी भाषा आंदोलन के भी अग्रिम पंक्ति के नायक साबित हुए। 17 more words

Columns

Struggle of Independence-III Phase (AD 1927-1939)

The India’s struggle for freedom against despotic British rule took decisive turns towards a broad-based popular struggle under the M.K Gandhi’s leadership. This was the phase of real awakening against tyranny of minority and full-fledge movement for the getting Poorn Swaraj. 871 more words

Indian History

29th May in Dalit History - Dr. Ambedkar with the Simon Commission

Dr. B. R. Ambedkar on behalf of the Bahishkrita Hitakarini Sabha (Depressed Classes Institute of Bombay) raised issues concerning the state of education of the Depressed Classes in the Bombay presidency in front of Simon Commission (Indian Statutory Commission) on 29th May 1928 at Damodar Hall Parel, Bombay. 10 more words

Dr B R Ambedkar