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Revisiting 'Sparsh'

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What do you feel when you see a blind person? Most people feel pity. Most people try to help a blind person which is very nice but is there an assumption that blind people are always dependent? 410 more words

Bollywood

SPARSH: Paranjpye's Deft Touch

In the dark world of the blind, touch is the only true guide — Sparsh (Hindi for ‘touch’). But whether the blindness shuts the world out and makes the blind incapable of engaging with the world visually, or makes the blind stay in touch with their own alternative world running parallel to the world of the sighted without losing touch with either of the two, or whether they have a combination of the two worlds to savour are certainly not the easiest questions to answer. 1,236 more words

Movie Review

BOLLYWOOD, AISHWARYA AND THE BLIND IN INDIA

Most Indian moviegoers are familiar with the iconic Shirdiwale Saibaba song where a blind Nirupa Roy miraculously gets her eyesight back. Just like that! (See… 994 more words

Blindness

Sparsh Urja:Ek Rahasya

हमारा शरीर एक उर्जा केंद्र है,इसमें सतत उर्जा का संचरण होता रहता है,यह उर्जा ग्रहित,संचित,और प्रवाहित तीनों रूपों में रहती है |उर्जा का एक चक्र हमारे मस्तक के चारों और वलियत होता है,जिसे औरा कहते हैं,जिसे सामान्य दृष्टी से नहीं देखा जा सकता है |इसका प्रतिरूप हम देव प्रतिमाओं में देख सकते हैं |जिसका जितना बड़ा औरा होता है,वह उतना ही ज्यादा उर्जावान होता है |

हमारे शरीर के तीन महत्वपूर्ण अंग हैं,मस्तक,हाथ और पैर | मस्तक उर्जा का ग्राहता,हाथ ग्राहता और प्रदाता,तथा पैर प्रदाता मात्र होते हैं |

जब हम किसी दूसरे का स्पर्श करतें हैं तो उर्जा का आदान-प्रदान होता है |आपने इस प्रथा पर यदि गौर किया तो पायेंगे, कि हम अपनों से बड़ों का हाथ आशीर्वाद स्वरूप अपने मस्तक पर रखवाते हैं,उद्देश्य यही होता है कि उनकी संचित उर्जा का कुछ अंश हमारा मस्तक ग्रहण कर सके |हम अपनों से बड़ों के चरण-स्पर्श करते हैं ताकि उनके चरणों से प्रवाहित उर्जा को हमारे हाथ ग्रहण कर सकें |उर्जा प्राप्ति के उद्देश्यार्थ ही हम देव प्रतिमाओं तथा बड़ों के चरण छूते हैं,तथा मस्तक पर हाथ रखवाते हैं |

हमारी संस्कृति में अभिवादन की परम्परा में हाथ जोड़ने के पीछे यही मूल कारण था कि हमारी उर्जा संचित रहे,उसका प्रसारण ना हो |पाश्चात्य संस्कृति कि नक़ल कर हम अभिवादन स्वरुप हाथ मिलाते हैं,और अपनी संचित उर्जा का क्षय करते हैं |

यदि आपको अपनी उर्जा का संचय करना है,तो अभिवादन हाथ जोड़ कर कीजिए,हाथ मिलकर नहीं |अपनों से कम उर्जावान लोगों के स्पर्श से यथासंभव बचिए|

उर्जा आपकी स्वयं की निधि है,निर्णय भी आप स्वयं को करना है |

Bhav-abhivykti

To sadness

It is not easy to understand why people are afraid of sadness. Except when it consists of hordes of sorrow from traumas long suppressed, sadness can be a softening, warming experience that makes the heart more sensitive and open to love. 245 more words

Poetry

Sparsh

He has eyes but cannot see. He was born blind. She has eyes but only sees sorrow and loss all around. Her husband died three years ago. 512 more words

Life

Kashti by Sparsh

Another wonderful band I am glad to have heard live. They performed at the Kala Ghoda Festival in 2013, and I took a liking to their music. 43 more words

Reviews