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तुम तक... रांझणा...

‘दिल का लोकेसन क्या होता है? न लेफ़्ट न राइट, दिल तो सेन्टर मे होता है क्योंकि मुझे दर्द वहीं पर हो रहा था!’ महज दसवीं में पढने वाले कच्चे उम्र के कुंदन को जब दर्द-ए-आशिकी का छोंक लगता है तो लगता है दुनियादारी की बांतें मानो उसे घोंट कर पिला दी गई हो। काशी बनारस में कुन्दन कुछ अलग अंदाज में प्यार करना चाहता है। रांझणा हमे इसी कुंदन के गालों पर पड रहे थप्प्डों और सीने में दौडती सांसों की गिनती सिखाती है, निर्देशक आनंद राय ह्में जोया परोसते हैं जो पढी- लिखी कुलीन परिवार से होने के बावजूद भी अपने जाहिल भावनाओ और ऊसूलों के बीच उलझ कर रह जाती है। हिमान्शु शर्मा की कहानी में बिंदिया है जो अपने एकतरफा प्यार को हासिल करने के लिये सभी आधुनिक और रूढीवादी हथकंडे अपनाती है। साथ में है कुंदन पर जान तक लुटाने वाला उसका दोस्त मुरारी। 26 more words

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LOVE

Very rarely does it happen that I watch a show and I get attached to a character. Being a writer, it is very important for me to understand a character before I fall in love with him (or her).

221 more words
Ananya Narain