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Manzil Ki Talash Hai....

​Mujhe ye gam aur ye khusi dono raas hai,

Chalne ki aadat hai aur manzil ki talaash hai.


Raah me jitne mile sab apne hain sab khaas hai, 121 more words

Poetry

Blue Bus Chronicles |ब्लू बस क्रॉनिकल्स

बात ये नही है की मुझ सीट नही मिलती, पर एक हाथ से बस का डंडा पकड़ कर , एक हाथ से मोबाइल चलना इस अड्वेंचरस थिंग . अरे भीया 15 रुपे मे अब क्या बच्चे की जान लोगे क्या?? खैर ठीक भी ही, रास्ते चलते हुए विमल, राजश्री और रजनीगंधा की पिचकारियों से बचाव तो मिल रहा है ना…हन भीया आग्गे लो….

4 सालों के सफ़र मे ये आज तक समझ नही आया, की लड़कियों को बोनट पर ही क्यू बिठाया जाता है | पर भगवान जो भी करता है , अच्छे के लिए करता है इस वाक्य मे मुझे पूर्ण विश्वा…स है |साफ शब्दो मे लिख कर चिपकाया जाता है, की “सीट 1 से 10 महिलाओं के लिए आरक्षित है” पर भीया पोहे की कसम, आज तक इन सीटन पर मैने लड़की को बेते नही देखा | अरे भीया, अगर लड़कियाँ बैठ जाएगी, जो ख़िड़ी मे से विमल की पिचकारी आपके काका कैस मारेंगे …???

आँखें ….बस यही तो दिखता है, बोनट पर, और ड्राइवर के कॅबिन मे |और सनसिल्क और वाटिका शम्पू की भीनी भीनी महक, फॉग सेंट के साथ , अजी वो तो कॉम्पलिमेंट्री है| आखें नही होती, ये सिग्नल ट्रॅनस्मिटरर होते है| भंवरकुआ से लेकर राजीव गाँधी प्रतिमा तक सबकी आँकें कहीं ना कहीं से सिग्नल पकड़ ही लेती है, बाकी निराश ना हो, अभी राजेंद्र नगर आना बाकी है| तो जनाब ,गड़बड़ी मे जो बड़ी सी गड़बड़ी है ना, बस वही सारी गड़बड़ी हो जाती है | जहा स्टियरिंग घुमा तो आप मैडम के उपर, फिर जैसे ही स्टियरिंग घुमा मेडम आपके उपर…खुदा सबकी सुनता है…..

“ये लोग इतने स्टूडेंट्स को चढ़ाते ही क्यू है,खड़े रहने की जगह तो होती नही है” मेडम भंवर कुआ से चढ़ी थी, पिंक येओ सूट, खुले बाल और यार्डली लंडन की महक, बात करना तो बनता है साहब.

“आप लोगो को भी सीट मिल जाती है, हमको तो ऐसे ही ट्रॅवेल करना होता है”

“हां, बहुत टफ होता है ना ”

“हां यार” और बातें निकल पड़ी सैर को…..

इतना ही काफ़ी होता है किसी लड़के को दिन मे सपने दिखाने के लिए, और लड़के की छोड़िए वो तो अपने बच्चे का नाम भी सोच चुका है, होता है| पर इन्हे कों बतायें, की आज इन लड़कियों के सो कॉल्ड बाय्फरेंड्स अर्थात कृत्रिम पतिदेव का बॅलेन्स ख़तम हो गया है, अन्यथा आपको इनकी आवाज़ भी सुनाई नही देती….

खैर प्रेम कथाएं तो लिखी ही इसी लिएजाती है की अधूरी छोड़ी जा सके, दर्द तो तब उठने लगता है जब अल्फ़ा आजाता है….

दोनो मेडीकप्स पर उतर जाते है,

लड़की बिना मुड़े कॉलेज को चल देती है….

लड़का खड़ा देखता रह जाता है………

Where are you | तुम कहाँ हो

कभी कभी ट्रेन मे सिंगल विंडो सीट पर
आँखें  तुम्हे ढूँढती है, तुम कहाँ हो,
कभी कही चलती हवाओं मे ढूँढने लगती है
तुम्हारी खुश्बुदार ज़ूलफें, तुम कहाँ हो
या यूँ कह लो, के पोहे की प्लेट मे , एक चम्मच
किसी का करता है इंतेज़ार की तुम कहाँ हो,
यही हर चहेरे मे ढूँढ ती है नज़रे
तुम्हारा अक्स ना जाने  तुम कहाँ हो…………..

मैं अकसर गम ज़द हो जाता हूँ, देख कर
उड़ते हुए परिंदो का जोड़ा, तुम कहाँ हो
आँखें थक गयी है दीदार को तेरे,क्यू जाने
फूल खुश्बू को पूछते है, तुम कहाँ हो
नींद आँखो मे बर्फ सी रहती है,
आँसुओं से झगड़ती है तुम कहाँ हो
साँसे जिस्म मे होती है फिर भी दिल से पूछती है
ज़िंदा हो तो ये बताओ आए धड़कनो तुम कहाँ हो…..