Tags » Teaching + Education

Are you prepared to go unexpected places?

You know how it goes: “If someone told me 10 years ago that I would be such and such, I wouldn’t have believed them in a million years.” 652 more words

Drama

Ten Months in the Making: A New Beginning

It was in December 2016 that I accepted an offer to teach drama in Saudi Arabia.

Ten months later, in September of 2017, I am finally set to have my first class. 281 more words

Drama

#Literary gems- James Reaney

“The lemonade was always slightly green and sour like the moon when it’s high up in a summer sky.”

“I never got used to high school. 17 more words

Literature

The Positive Power of a Mentor

Dr. Walter Fremont, the late educator who motivated me for my teaching career, once said during a class lecture that no one should write a book until he was at least 50 years old. 667 more words

06.23.17: Summer 2017

I am very happy to announce that this summer, I will be teaching community dance workshops at both Arts at the Armory in Somerville (Youth Arts Arise program) and the… 114 more words

Dance

The Underground Railroad

From Colson Whitehead’s Pulitzer prize-winning #novel.

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What did you get for that, for knowing the day you were born into the white man’s world? It didn’t seem like the thing to remember. 65 more words

Literature

charaka sutra

द्रव्यों के संयोगवश से आहार की कल्पना असंख्य प्रकार की है । मनुष्यों के वह आहार असंख्य प्रकार के होते हुये हितकर और अहितकर दों प्रकारों में विभक्त हैं । उनका वर्णन करते हैं ।।
– चरक संहिता

वह इस प्रकार हैं लाल शालिचावल सब शूक धान्यों में सर्वश्रेष्ठ पथ्य गिने जाते हैं इसी प्रकार सब प्रकार के शमीधान्य में मूंग सर्वश्रेष्ठ है। जलों में शुद्ध आकाश का जल सर्वश्रेष्ठ है । नमकों में सेंधा नमक श्रेष्ठ है सागों में जीवन्ती का साग श्रेष्ठ है । मृगमांसों में काले हिरण का मांस श्रेष्ठ है । पक्षीयों में लवा, विलेशयों में गोह , मंछलियों में रोहित, घृतों में गोघृत, दूधों में गोदूध, स्थावर स्नेहों में तिलतैल, अनूपसंचारी जीवों की चर्बी में सूअर की चर्बी , मछलियों की चर्बी में चुलुकीन्मक मछली चर्बी, जलसंचारी पक्षियों की चर्बी में हंस या वत्तककी चर्बी सर्वोत्तम मानी जाती है । विष्किर पक्षियों की चर्बी में मुर्गे की चर्बी,शाखापत्रखानेवालों में बकरे की चर्बी उत्तम है। मूलों में अदरक , फलों में मुनक्क़ा , ईख के विकारों में मिश्री सर्वोत्तम कही जाती है। इस प्रकार स्वभाव से ही हितकारी प्रधान २ आहारों का वर्णन किया गया ।।

– चरक संहिता

अब अहितकारक द्रव्यों का वर्णन करते हैं शूकधान्यों में जव, शमीधान्यों में उडद, जलों में वर्सात की नदी का जल, नमकों में खारी नमक, सरसों का साग अहितकर कुपथ्य होता है । पशुओं के मांसों में गोमांस, पक्षियों मे काल-कपोत, विलेशियों में मेंढक , मछलियों में चिलचिम मछली, घृतों में भेड का घृत, दूधों में भेड का दूध, स्थावर स्नेहों करडका तैल अहितकारी होता है । अनूपसंचारी जीवों की चर्बी में भैंसे की चर्बी , मछलियों की चर्बी में कुम्भीर की चर्बी, जलचर जीवों में जलकौआ की चर्बी अहितकारी होती है । विष्किर पक्षियों में चिडिया की चर्बी, शाखापत्र खानेवाले जानवारों में हाथी की चर्बी निंदनीय होती है। कंदों में पकी हुई मूली , फलों में कटहर, ईख के पदार्थों में खंडित अहितकारी होता है । इस प्रकार स्वभाव से ही अहितकारी द्रव्यों का वर्णन किया गया है ।

– चरक ऋषि

Mental