Tags » Tribal Culture

New Warm Springs Academy Offers Lessons In Tribal Culture

OREGON – Every Monday at the Warm Springs Academy about 30 kids gather in a circle for a blessing song. They’re part of the “Soaring Butterflies, Warrior Spirit” after-school program focused on tribal culture. 97 more words

News

Trek Trek and Trek Some More

Returning to Luang Nam Tha, I booked another trek with a cheaper company for another two days and one night. This trek was with eight other people, trekking into the Nam Ha NPA and a village home stay, just like the previous one. 544 more words

Travel

Ethnic Tribal culture of India: Palas Parbon - An Initiative

Purulia is a district at south-west corner of West Bengal. A mysterious area, if we try to consider it as its cultural aspects. I hope you have seen the Satyajit Ray movie, Agantuk. 156 more words

Life And People

Whistle-Stop Malaysia

So, somewhere between squeezing the last drops of life out of my Myanmar visa and arriving in Northern Sumatra to meet some friends, I had a couple of weeks to kill in Malaysia. 992 more words

On The Road

The Colors of India

If there is one place on the face of earth where all the dreams of living men have found a home from the very earliest days when man began the dream of existence, it is India!” ~Romaine Rolland… 42 more words

Infrared Imagery

माळीन

एक होतं गाव माळीण त्याचं नाव (उत्तम कांबळे)
– उत्तम कांबळे uttamkamble56@gmail.com
रविवार, 28 डिसेंबर 2014 – 04:00 AM IST

Tags: saptrang, uttam kamble, malin… 13 more words

आदिवासी आरोळी

परिंदे

परिंदे….
by राजू ठोकळ

अच्छे दिनों के सपनें
हम खो बैठे अपनें
क्या यही कुर्बानी माँगता
अपने जन धन का खाता

कितने अरमान बह गए
लाल खून के बूंदों तले
कितने आदिवासी मारे गए
गोलिओं की बौछार तले

आम आदमी रो रहा है हरपल
हर आदिम सांस मर रही हरदम
जल जंगल की खुनी हरीयाली
काल बने साथी आँसू हरकदम

किस उजाले को प्रणाम करू
जो हमारी चिता से चमकता है
कौनसी आरजू को सलाम करू
जो मेरी साँसों को तडपाता है

आज भी याद है ओ सुनहरा दिन
स्वतंत्रता का दिया था कभी मैंने नारा
आजादी के लिए उठनेवाले हजारो हाथ
अफसोस गला दबा रहे है हमारा

सुवर्ण रेखाए हमारे अतीत की
इन्हें शायद हजम नहीं होती
सोने जैसे उजागर जीवन का
आज मौत भी साथ नहीं छोड़ती

जिसकी करते आए हम पूजा
ओ सब आज लुट लिए तुम
आज बचा न कुछ झोली में
तो आपकी खाते गोलियाँ हम

मै याद दिलाता हूँ समाजोगे शायद
हम है धरती माँ के आजाद परिंदे
आप अगर चूसते रहे ऐसे ही खून तो
कल जन्म लेंगे ऐसे लाखो खुनी दरिंदे

संभलना जानते हम मानव सम्मान को
हमारे आज को ऐसे ना बरबाद करो
प्रकृती के चरणों में झुके हमारे सर को
हैवानियत की नियतसे ना क़त्ल करो

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