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इरशाद -15

” देखते हैं कहाँ ले जाकर छोड़ेगा ये सफ़र ज़िन्दगी का,

हमारी कहानी तो मौत पर भी ख़त्म ना होगी | “

– सहर

इरशाद-13

कद काफी ऊँचा था उस शख्श का जमाने में,
जिसके घर की छत उसके सर को छूती थी.

– Unknown 6 more words

इरशाद-10

ख़्वाब अनगिनत और बेशक़ीमती थे,
सिर्फ ख्वाबों की कोई नहीं बिसात ।
जब चला मुसाफिर बन के सफर पर,
हर दर जीता, हर दर खायी मात।

इरशाद -7 

जो मिला नहीं महबूब की अँगड़ायीं में,
वो सुकून मिला मुझे मेरी तनहायी में।
उस राह पे चल पड़े जिधर कोई ना था,
मीलों चलते रहे ख़ुद की रहनुमाई में ।

#ALFAAZ APNE APNE 1.

किसी की इज्ज़त क्या कर ली, थोड़े खामोश क्या हो गए,
ज़माने में काफिर और एहसान फरामोश से हो गए।

© उमंग शाही।

Rooh

इरशाद - 4 

रोज़ सोचते हैं कुछ नया होगा ,

अब तू मिल भी जाए तो क्या होगा ?

जिस इंसान ने चाहा था तुम्हें

मर चुका है वो, पता होगा।

इरशाद -3

तू खुदा है न मेरा इश्क़ फ़रिश्तों जैसा,

दोनों इंसा हैं तो क्यों इतने हिजाबों में मिलें ।

– अहमद फ़राज़।