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इरशाद 19. 

“अब जाकर कुछ मायने में पहली मोहब्बत धुँधली हो चुकी है,

तेरी बातें, तेरी यादें, और अब तेरी तस्वीर भी खो चुकी है।

सहर नहीं होने दी हमने आपके इन्तज़ार में आज तक,

the other side of the tree

i know not what you’re going through, or how to help you,
but i hope my little joys will yet draw a smile from you or two.

Q

Poems

इरशाद- 17

‘नई सुब्ह पर नज़र है मगर आह ये भी डर है
ये सहर भी रफ़्ता रफ़्ता कहीं शाम तक न पहुँचे।’

– शकील बदायूनी। 

इरशाद-16

“कह चुका हूँ जो भी था दरमियाँ,पर ख़्वाहिशें अब भी होश खो रहीं हैं।”

– सहर।

Shayri

इरशाद -15

” देखते हैं कहाँ ले जाकर छोड़ेगा ये सफ़र ज़िन्दगी का,

हमारी कहानी तो मौत पर भी ख़त्म ना होगी | “

– सहर

इरशाद-13

कद काफी ऊँचा था उस शख्श का जमाने में,
जिसके घर की छत उसके सर को छूती थी.

– Unknown 6 more words

इरशाद-10

ख़्वाब अनगिनत और बेशक़ीमती थे,
सिर्फ ख्वाबों की कोई नहीं बिसात ।
जब चला मुसाफिर बन के सफर पर,
हर दर जीता, हर दर खायी मात।