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favour

couldn’t escape from you if i tried to flee.

i don’t even like myself; but you liked me.

Poems

जो हमसे रूठ बैठे है..

तारीफों के हकदार वो, क्यूँ हमसे दूर बैठे है,
शाम हुयी आज फिर जवां उनकी याद में,
जो हमसे रूठ बैठे है..

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कुछ पुराने दोहे..

ढूंढ लाते हम उनको गर वो खो जाते,
पर बदले लोगों को ढूंढना नही आता..

ग़म भी है और ख़ुशी भी,
पर वो साथ नहीं,
और वो हम नहीं..

कहते है किसी के चले जाने से जिंदगी ख़त्म नहीं होती,
पर क्या साँसों का चलना भर ही जिंदगी है?
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वो लोग, जो कल तक हमारे लिये दुआएं करते थे,
वही आज तुम्हें भुलाने की सलाह देते है..
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हर ख्वाब पूरा नहीं होता,
पर ख्वाब में कुछ भी अधुरा नहीं होता..
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मिले फिर वही जो कल भी मिले थे,
पर मिलें इस कदर कि वो बिलकुल नए थे..
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घुटता है दिल, कुछ कह भी नहीं पाता,
छोड़ गया मेरा कल, आज अब हंस भी नहीं पाता..
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क्या हस्ती है तुम्हारी..
मुहब्बत हम कर नहीं सकते और नफरत तुम करने नहीं देती..
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अब और नहीं तड़पाओ,
अब और न हमको सताओ,
मै दूर तुमसे चला जाऊं,
आखिरी बार तो मिलने आओ.
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-सन्नी कुमार

मेरी कविता

爱的号码牌

the queue is long and her admirers many,

‘take a number sir, you’re number twenty.’

note: the title literally means ‘the number card of love’, referring to the numbers usually given out on sheets of paper at queues. 29 more words

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