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是不是安全 VS 要不要安全

最近,WPA2爆出了漏洞,几乎影响了所有的支持WiFi的设备,于是安全界和各大厂商就很快修补该漏洞,但与此同时,我在Telegram看到一条评论,大概意思是这样(原评论已被删):WPA的漏洞对于普通人而言完全不需担心,毕竟又不是重量级人物…等等(原句更夸张一些),因此这个人觉得这个漏洞没有任何影响。

这种逻辑,如果把它延伸下去,就像是:“MD5和SHA1已经有人工碰撞了啊,但又没有人用这个来搞你,所以它们也都是安全的。”

问题在哪里呢?本身是不是安全和要不要安全是两个完全不同的概念。是不是安全是绝对的,要不要安全则是一个相对的概念。这种逻辑的问题在于把要不要安全拿来反驳是不是安全。

End~

Undefined

ESCAPE

Imagine starting fresh…… Getting out of your comfort zone is scary and heart pounding. Everyday deep down we go and search for something new; maybe experience, people, food, culture, love, hobbies, adventure. 184 more words

The Longing

Back when Seagulls soar above the ocean
Before the ocean can even reflect the sky
My thought were filled with nothing
No dreams, desire, nor life… 131 more words

Poem

I

I am my own critic.
I can be my own nightmare.
I have never been sure of myself and my choices.
I have a lot of insecurities inside me that may not be seen as something uncommon. 251 more words

Poem

The Nightmare Inside

You are my creator,
Though my presence is not profound.
I’m a sign of bad omen,
Even though I am the one who keeps you safe and sound. 143 more words

Poem

मैं और शिबी

आज मुझे कोई सबसे ज़्यादा याद है तो शिबी.
मेरी पत्नी मुझे छोड़कर चली गयी थी और मै समय के प्रवाह के साथ बह रहा था , तो शिबी से मेरी मुलाकात हुई. जहाँगीर आर्ट गॅलरी में, जब उसकी कुछ ढूँढती आँखें मेरी खोई हुई आँखों से टकराई, मुझे याद है वह क्षण. हम फिर पूरे दिन साथ रहे, पूरी रात भी, और फिर कभी अलग नहीं रह पाए. मेरे और मेरी पत्नी के बीच अहम का एक पहाड़ था, और मेरे और शिबी के बीच अगर कुछ नहीं था तो अहम.
उसने हमारा रिश्ता ऐसे सहेजा हुआ था जैसे वाद्य में सुर होते हैं. हम आत्मसखा थे. बीस साल साथ रहे. पिछली २३जुलाई की रात तक, जब मैं एक बुरे सपने से बाहर आया, शिबी का हाथ मेरी छाती पर रखा था. एकदम ठंडा. पहले तो मुझे लगा यह मेरा हाथ है और मैं मर चुका हूँ. मगर नहीं, ऐसे खूबसूरत रिश्ते में भाग्यशाली पहले जाता है.
वह जब औरत के लिए कुछ कहता था तो बोलता- ‘ ये रोती हुई रानियाँ’ और पुरुष के लिए कहता- ‘ तुम बेदिल बदतमीज़’. इस से ज़्यादा कठोर शब्द उसने कभी इस्तेमाल किए. मुझे नहीं पता शिबी पुरुष था या स्त्री. हालाँकि हम ज़्यादातर एक ही बिस्तर पर सोते भी थे. उसे पता था मैं पुरुष हूँ. मैं उसे जैसा मन हुआ वैसे बुलाता था- ‘ आज शाम को कहाँ जाना चाहोगी’ या ‘अब तैयार भी होगा या इस पेंटिंग में ही उलझा रहेगा’. सहूलियत के लिए यहाँ उसे पुल्लिंग बता रहा हूँ.
मैने उस दिन उसे अपने हाथों से नहलाया. एक छोटे बच्चे सा लग रहा था. मगर मुझे आज भी नहीं पता शिबी एक पुरुष था या स्त्री थी .कभी मेरे पिता सा, कभी माँ सा, कभी पत्नी सा, कभी भाई सा, कभी बहन सा, वह मेरा सब कुछ था. मैं एक लेखक था और शिबी एक पेंटर. वह ज़्यादातर मेरी कहानियों की पैंटिंग बनाता था. उस के जाने के बाद मैने कोई कहानी नहीं लिखी है. मेरी कहानियाँ तो आपने पढ़ी हैं, मगर जब आप शिबी की पेंटिंग देखेंगे तो मेरी कहानियाँ उनके सामने छोटी पड़ जाएँगी.
बाद में सभी लेखक और आर्टिस्ट मित्रों को फोन किया. मेरी पत्नी भी आई थी. सब उठ कर जा रहे थे तो मेरे पास आई. “अब क्या करोगे? तुम्हें तो अपनी देखभाल करना भी नहीं आता. चाहो तो मेरे पास आकर रहो.”
मैने कहा,” नहीं, अब संभव नहीं होगा. अब तो मेरा एकांत ही मेरी दुनिया है.”
मुझे लग रहा था. प्रलय के बाद मैं अकेला बचा हूँ और सृष्टि का फिर से सृजन होना है.

India

Inspiration 2

In love and frustrated. This is a permanent state for me.

Today is a particularly bad day. I woke up feeling lost, alone and abandoned. The sun is shining and the world seems to be happy in its summer dress. 233 more words

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