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Cold Weather, Warm Mugs; A Time for Turmeric Milk

It’s that time of year where throats start to hurt and noses start to run. Before any of these uncomfortable symptoms develop further, notice that this is your body’s way of conveying to you that it is requiring more support and attention now than usual. 270 more words

Vata Season Tortilla Soup Recipe

Vata season (Fall) is one of my favorites because I enjoy soup so much. I remember that as a child, we always had soup as part of our family dinner. 306 more words

Recipe

Living in balance with seasons - Fall

Fall is the most vulnerable season of all. It is the period of transition from a fast paced summer, with intense outward energy into a slow, energy preserving, introspective winter. 1,103 more words

Ayurveda

आयुर्वेद, शारीरिक संरचनाये और उनके प्रभाव

आइये आज यह जानने की कोशिश की जाए की आयुर्वेद की शुरुआत कैसे, कब और कहाँ से हुई? आयुर्वेद कैसे विभिन्न शारीरिक संरचनाओं के अनुसार कार्य करता है?

आयुर्वद का ज्ञान पहले भारत के ऋषि मुनियों के वंशो से मौखिक रूप से आगे बढ़ता गया उसके बाद उसे पांच हजार वर्ष पूर्व एकग्रित करके उसका लेखन किया गया। आयुर्वेद पर सबसे पुराने ग्रन्थ चरक संहिता, सुश्रुत संहिता और अष्टांग हृदय हैं। यह ग्रंथ अंतरिक्ष में पाये जाने वाले पाँच तत्व-पृथ्वी, जल वायु, अग्नि और आकाश, जो हमारे व्यतिगत तंत्र पर प्रभाव डालते हैं उसके बारे में बताते हैं। यह स्वस्थ और आनंदमय जीवन के लिए इन पाँच तत्वों को संतुलित रखने के महत्व को समझते हैं।आयुर्वेद के अनुसार हर व्यक्ति दूसरों के तुलना मे कुछ तत्वों से अधिक प्रभावित होता है। यह उनकी प्रकृति या प्राकृतिक संरचना के कारण होता है| आयुर्वेद विभिन्न शारीरिक संरचनाओं को तीन विभिन्न दोष मे सुनिश्चित करता है।

  1. वात दोष: जिसमे वायु और आकाश तत्व प्रबल होते हैं।
  2. पित्त दोष: जिसमे अग्नि दोष प्रबल होता है।
  3. कफ दोष: जिसमे पृथ्वी और जल तत्व प्रबल होते हैं।

दोष सिर्फ किसी के शरीर के स्वरुप पर ही प्रभाव नहीं डालता परन्तु वह शारीरिक प्रवृतियाँ (जैसे भोजन का चुनाव और पाचन) और किसी के मन का स्वभाव और उसकी भावनाओं पर भी प्रभाव डालता है। उदाहरण के लिए जिन लोगो मे पृथ्वी तत्व और कफ दोष होने से उनका शरीर मजबूत और हट्टा कट्टा होता है। उनमे धीरे धीरे से पाचन होने की प्रवृति,गहन स्मरण शक्ति और भावनात्मक स्थिरता होती है। अधिकांश लोगो मे प्रकृति दो दोषों के मिश्रण से बनी हुई होती है। उदाहरण के लिए जिन लोगो मे पित्त कफ प्रकृति होती है, उनमे पित्त दोष और कफ दोष दोनों की ही प्रवृतिया होती है परन्तु पित्त दोष प्रबल होता है। हमारे प्राकृतिक संरचना के गुण की समझ होने से हम अपना संतुलन रखने हेतु सब उपाय अच्छे से कर सकते है।आयुर्वेद किसी के पथ्य या जीवन शैली (भोजन की आदते और दैनिक जीवनचर्या) पर विशेष महत्त्व देता है मौसम मे बदलाव के आधार पर जीवनशैली को कैसे अनुकूल बनाया जाये इस पर भी आयुर्वेद मार्गदर्शन देता है।

तथ्य

Vata Season - Fall & Winter

Here in the Northeast it’s hard not to notice the seasonal shift that seems to take place right after Labor Day. The shorter days, cooler mornings and dry falling leaves symbolize the beginning of Vata Season on the Ayurvedic clock. 419 more words

Ayurveda

Philosophy of Ayruveda

Ayruveda is a traditional medicine system from India. Its focus is on the tridosha theory, that all individuals fall in to one of three categories or a combination of the categories. 463 more words

Wellness

Winds of change

I woke up, fresh and alert at around 3:30 this morning. While it was way too early, I didn't really feel like staying in. So, out of bed it was and the kittens were happy to see me, or so I like to think. 198 more words

Asana