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सेना संघ हुँकार भरे

आओं सेना संग हुँकार भरे
चल कश्मीर की थाती पर
“रवि” शिव तांडव नृत्य करे
इस जिहाद की छाती पर

सैलाब के वक्त कुकुर जो
भिक्षा को हाथ उठाते हैं
पाकर खाना भीख जान अब
पत्थर सेना को दिखलाते है

तन बेशक से नाम भले “रवि” ये
भिक्षा को हिंदुस्तानी बन जाते हैं
पर मन में पाले भ्रम खुद
पाकिस्तानी झंडे ही फहराते है

कह दो इन गद्दारों से
सेना को ज़ख्म स्वीकार नही
बार लाख भले ही लड़ ले
देंगे हम वीभत्स प्रतिकार यही

केसरिया घाटी में सेना की
रक्षा को अब ये प्रण होगा
याचना नही अब रण होगा
याकि जीवन या मरण होगा।
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रवि कुमार “रवि”

Veer Ras

ये सोच कर मैंने तलवार की कलम उठाई है

यही सोच कर मैंने
कलम की तलवार उठाई है
हिन्दू हित चिंतन के आगे
और भी बड़ी लड़ाई है
कुछ अपने ही गद्दार हुए है
सत्ता सुख की खातिर
अस्तित्व बचाने की है चिंता
हिन्दू सूरज देता डूबता दिखाई है
हर हर महादेव, जय श्री राम कहने से केवल
हिन्दू धर्म का हित न होगा
जब तक हर हिन्दू न जागे
और हिन्दू शौर्य ने लेती अंगड़ाई है
ये सोच कर मैंने
तलवार की कलम उठाई है
हिन्दू हित चिंतन के आगे
और भी बड़ी लड़ाई है
…………..
रवि कुमार “रवि”

Veer Ras

संगीनों के साये में यारो आज़ादी चलती है

संगीनों के साये में यारो आज़ादी चलती है …………..
वक्त उधर ही चलता है जिस और जवानी चलती है …………..
है कौन वो माँ का लाल जो यारो अपने लहू से खेलेगा
रक्तरंजित हाथो से अपनी भारत माँ की किस्मत बदलेगा
चैन चमन में आता है जब बंदूके गरजा करती है
फाड़ के जब दुश्मन का सीना गोली निकला करती है
संगीनों के साये में यारो आज़ादी चलती है …………..
वक्त उधर ही चलता है जिस और जवानी चलती है ……………
…………
रवि कुमार “रवि”

Veer Ras