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Keep Going into the Sunset

<a href=”https://dailypost.wordpress.com/photo-challenges/future/”>Future</a&gt;

Sunset is the most fascinating phenomenon that repeats every 24 hours, this time of the day is very positive because one thing is for sure as everyone wants to go back home and wind up. 115 more words

Vinay

Vinay Rama - Building Confidence in Clients

Many professional athletes get to excel in their sports because of their desire to get better every day and the effort they invest into this development. 244 more words

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भगवान वामन श्री हरि के पहले ऐसे अवतार थे जो मानव रूप में प्रकट हुए थे 13429329

हमारे वेदों में चार युगों का वर्णन मिलता है। ब्रह्माजी का एक दिन यानी चार वेदों का समय है। यह समय सौर वर्ष ( 12 माह से सौर वर्ष बनता है और सौर वर्ष का प्रथम दिन ‘मेष’ होता है।) में उल्लेखित है। चार युगों में सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग और कलयुग आते हैं।

त्रेतायुग दूसरा युग था जिसमें अधर्म का नाश करने के लिए भगवान विष्णु तीन अवतार लिए थे, जो क्रमशः वामन अवतार, परशुराम अवतार और श्रीराम अवतार के नाम से हमारे हिंदू धर्म ग्रंथों में उल्लेखित हैं।

त्रेतायुग में भगवान विष्णु के पांचवें अवतार के रूप में वामन अवतार लिया गया था। पहले चार अवतार क्रमशः मत्स्य, कच्छप, वाराह और नृसिंह थे। वामन अवतार में उन्होंने राजा बलि से तीन पग जमीन मांग कर धरती की रक्षा की थी। छठवां अवतार भगवान ने परशुराम का लिया। इसके बाद भगवान श्रीराम के रूप में भगवान विष्णु इस धरती पर जन्मे थे।

वामन अवतार: भगवान वामन श्री हरि के पहले ऐसे अवतार थे जो मानव रूप में प्रकट हुए थे। उनके पिता वामन ऋषि और माता अदिति थीं। वह बौने ब्राह्मण के रूप में जन्मे थे। वामन भगवान को दक्षिण भारत में उपेन्द्र के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि वह इंद्र के छोटे भाई थे।

भागवत पुराण के अनुसार भगवान विष्णु ने इंद्र का देवलोक में पुनः अधिकार स्थापित करने के लिए यह अवतार लिया। दरअसल देवलोक पर असुर राजा बली ने विजयश्री हासिल कर इसे अपने अधिकार में ले लिया था। राजा बली विरोचन के पुत्र और प्रह्लाद के पौत्र थे।

उन्होने अपने तप और पराक्रम के बल पर देवलोक पर विजयश्री हासिल की थी। राजा बलि महादानी राजा थे, उनके दर से कोई खाली हाथ नहीं लौटता था। यह बात जब वामन भगवान को पता चली तो वह एक बौने ब्राह्मण के वेष में बली के पास गये और उनसे अपने रहने के लिए तीन पग के बराबर भूमि देने का आग्रह किया। उनके हाथ में एक लकड़ी का छाता था। गुरु शुक्राचार्य के चेताने के बावजूद बली ने वामन को वचन दे डाला। इस तरह भगवान ने दो पग में धरती, आकाश नाम लिया, चौथा पग उन्होंने राजा बलि के सिर पर रखा था। जिसके बाद से राजा बलि को मोक्ष प्राप्त हुआ।

परशुराम अवतार: भगवान विष्ण के छठवें अवतार के रूप में राजा प्रसेनजित की पुत्री रेणुका और भृगुवंशीय जमदग्नि के पुत्र के रूप में जन्में थे। इस अवतार में वह भगवान शिव के परम भक्त थे। इन्हें शिव से विशेष परशु(फरसा) प्राप्त हुआ था। इनका नाम तो राम था, किन्तु शंकर द्वारा प्रदत्त अमोघ परशु को सदैव धारण किये रहने के कारण ये परशुराम कहलाते थे।

श्रीराम अवतार: श्रीहरि ने सातवें अवतार के रूप में श्रीराम के नाम से जन्म लिया। वह अयोध्या में राजा दशरथ और माता कौशल्या के पुत्र के रूप में जन्मे थे। इस अवतार में वह मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाए। उन्होंने लंकापति रावण के अलाव कई दैत्यों का अंत किया। श्रीराम की संपूर्ण गाथा वाल्मीकि रामायण में उल्लेखित है।

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VGSoM Science &amp; Technology

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Great Pm of india

खत्म होगा सूखे का संकट! मोदी लेकर आए बड़ी योजना, भाजपा ने चला बड़ा दांव
April 23, 2016 1 3217

चुनावी साल में गर्माई उत्तर प्रदेश की राजनीति के बीच ‘सूखा’ बुंदेलखंड एक बार फिर केंद्र बिंदु में आ गया है। मोदी सरकार की चिंता में बुंदेलखंड किस कदर शामिल है इसका अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि पीएम नरेंद्र मोदी खुद ‘प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना’ (पीएमकेएसवाई) की शुरुआत बुंदेलखंड से करने जा रहे हैं। हालांकि, योजना की लांचिंग की तारीख फिलहॉल तय नहीं हुई है।

पहले अतिवृष्टि और फिर सूखे ने बुंदेलखंड के किसानों को दोहरी मार दी है। एक ओर किसान आत्महत्या को मजबूर हो रहे हैं, वहीं पलायन भी थमने का नाम नहीं ले रहा। हॉलात ऐसे हैं कि गांव के गांव सूने पड़े हैं। ऐसे माहौल में भाजपा ने भी किसानों के जख्मों पर मरहम लगाने का बड़ा राजनीतिक दांव चला है।

मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र की भाजपा सरकार बुंदेलखंड की धरती से पीएमकेएसवाई की शुरुआत करने जा रही है। योजना की लांचिंग भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों होगी। पूरी संभावना है कि योजना की शुरुआत बुंदेलखंड के केंद्र झांसी से हो। जल्द ही इसकी तिथि व स्थान की घोषणा हो सकती है।

मालूम हो कि देश में कुल 14.2 करोड़ हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि में से 65 प्रतिशत में सिंचाई की सुविधा नहीं है। इस योजना का मकसद यह है कि सूखे खेतों में भी फसलें लहलहाएं। इस लिहाज से यह योजना महत्वपूर्ण है। पीएमकेएसवाई को पांच सालों के लिए 50 हजार करोड़ रुपये राशि का प्रावधान किया गया है।

यह है प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना
– देश भर में सिंचाई में निवेश में एकरूपता लाना
– ‘हर खेत को पानी’ के तहत कृषि योग्य क्षेत्र का विस्तार करना
– खेतों में पानी के इस्तेमाल की दक्षता बढ़ाना
– पानी का अपव्यय कम करना, पानी की हर बूंद का इस्तेमाल
– फसल उत्पादन क्षमता बढ़ाकर किसानों का जीवनस्तर सुधारना
प्रधानमंत्री बुंदेलखंड की दुर्दशा से अच्छी तरह वाकिफ हैं। लोकसभा चुनाव के दौरान बरेली की रैली में मोदी ने कहा था कि बुंदेलखंड में केन, बेतवा, यमुना, पहुज, मंदाकिनी जैसी नदियां बहने के बावजूद यह क्षेत्र भीषण सूखे की चपेट में है। पीएमकेएसवाई के जरिये मोदी चाहते हैं कि सूखी नहरों में भी लबालब पानी भरा हो और इनके पानी से सूखे खेतों में हरियाली लहलहाए। ताकि, किसानों की हॉलत सुधरे और उनका पलायन रुक सके।

जल्द शुरू होगी केन-बेतवा नदी परियोजना
पीएमकेएसवाई के तहत केंद्र सरकार नदियों के जरिए बुंदेलखंड की नहरों का विकास करना चाहती है। इसके लिए रुकी हुई केन-बेतवा नदी परियोजना की जल्द शुरूआत होगी। बरुआसागर के तालाब को केंद्र बनाया गया है। योजना के पीछे सोच यह है कि बारिश का पानी संरक्षित किया जाए और इस पानी का उपयोग खेतों की सिंचाई में हो सके।

‘पीएमकेएसवाई के संबंध में कृषि विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों को मई के पहले सप्ताह से प्रशिक्षण दिया जाना है लेकिन खुद प्रधानमंत्री यहां से इसकी शुरुआत करेंगे, इसकी कोई औपचारिक जानकारी अभी नहीं मिली है।’
– अजय कुमार शुक्ला, जिलाधिकारी, झांसी

‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुंदेलखंड से योजना की शुरुआत करने पर सहमति जता दी है। हालांकि अभी योजना की लांचिंग की तिथि निर्धारित नहीं है। बुंदेलखंड के लिए यह प्रधानमंत्री की बड़ी सौगात होगी।’
– रत्नाकर पांडेय, क्षेत्रीय संगठन मंत्री